उर्दू में गजल कहता हूं, हिंदी मुस्कराती है
ललितपुर।
महान सूफी संत बाबा सदनशाह की दरगाह पर चल रहे पांच दिवसीय उर्स इजलास में शनिवार रात दरगाह परिसर में कौमी एकता मुशायरा का आयोजन हुआ। इसमें प्रख्यात शायर जौहर कानपुरी और डा. नवाज देवबंदी आदि की शायरी व कलामों में सारी रात श्रोता मदमस्त रहे।
नथगर में स्थित बाबा सदनशाह की दरगाह पर प्रतिवर्ष पांच दिवसीय उर्स का आयोजन किया जाता है। बाबा सदनशाह के 100वें उर्स इजलास के प्रथम दिन आयोजित कौमी एकता मुशायरे में देश के प्रख्यात शायरों का जमावड़ा रहा। यहां कुरान-ए-पाक की तिलावत कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसमें ताहिर फराज, शाहिद अंजुम, अयाज अहमद, मुश्ताक अहमद, अनवर अमान, फैयाज अहसन, नासिर जौनपुरी, शकील जमाली दिल्ली, मुश्ताक अहमद ने अपने कलामों से मुशायरे का जबरदस्त माहौल बनाया और जौहर कानपुरी ने मुशायरे को गति प्रदान की। उनका शेर न सोना साथ चलता है, न चांदी साथ चलती है, खुदा का शुक्र है, गरीबी साथ चलती है, को श्रोताओं द्वारा खूब पसंद किया गया। डॉ. नवाज देवबंदी ने भी अपनी प्रस्तुतियां से मुशायरे में खूब समां बांधा। गुना के दीपक जैन ने तो महफिल में चार चांद लगाते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने शेर पढ़ते हुए कहा कि मां की खिदमत है इबादत, ये सुना, तब से लगा कि इबादत हम बेवजू करते रहे, की खूब मांग रही। अन्य शायरों ने भी अपने कलामों से न केवल बाबा का यशगान किया, बल्कि श्रोताओं को भी एक से बढ़कर शायरी सुनाकर आनंद उठाने पर मजबूर कर दिया। प्रख्यात जौहर कानपुरी ने अपनी शायरी का जादू बिखेरा। उनकी हर नज्म, कलाम व शेर की सराहना हुई। जौहर कानपुरी ने शेर पढ़ते हुए कहा कि लिपट जाता हूं मां से, मौसी मुस्कराती है, मैं उर्दू में गजल कहता हूं, हिंदी मुस्कराती है, श्रोताओं को खूब पसंद आया। इससे पूर्व कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह व पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य व अंजुमन सदर असलम कुरैशी रहे। जबकि सदारत उर्स कमेटि सदर बाबू बदरुद्दीन कुरैशी ने की। वहीं उर्स में संरक्षक सुजान सिंह, अंजुमन सदर असलम कुरैशी, सदर उर्स कमेटी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, पूर्व नपा अध्यक्ष डा..सतीश कुमार सुड़ेले, जनरल सेक्रेटरी हाजी साबिर अली, जनरल सेक्रेटरी अजीज कुरैशी, नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला, कमरुद्दीन कप्तान, रमजानी दादा, नायब सदर अबरार अली, मीडिया प्रभारी मोहम्मद नसीम, रिजवान उज्जमा, मनीष अहमद कादरी, हाजी अनीस खां, हाजी सत्तार खां, हाजी अतीक अहमद, शाकिर अली, समीर चौबे, शरद चौबे, आसिफ कुरैशी, सरफराज मेम्बर, रज्जब अली शाह, मुश्ताक खान, हाजी इरशाद, आडीटर मुरारी लाल खटीक, समद घड़ीसाज, मु. जमील, सहादत अली, नवाब बख्श, मुस्तफा खा पार्षद उपस्थित रहे।
सभी धर्म के लोगों ने सदनशाह दरगाह पर टेका माथा
उर्स आयोजन के दूसरे दिन भी हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बाबा सदनशाह की दरगाह पर हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ माथा टेका और चादरें चढ़ाते हुए अमन चैन की दुआएं मांगी। सदनशाह उर्स के आयोजन में जहां आकर्षण का केंद्र झूलों में झूलने को लोग आतुर रहे, वहीं तरह-तरह की दुकानें सजाईं गई, जहां जमकर खरीदारी भी हुई। उर्स में जनपद के अलावा अन्य जनपदों व मध्य प्रदेश के भी कई व्यापारियों ने अपनी दुकानें सजाई हैं। जिला प्रशासन द्वारा यहां श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई असुविधा न हो इसके लिए बिजली, पानी व साफ-सफाई के खास प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है। देर रात तक अनुमानत हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा सदनशाह की मजार पर माथा टेका तथा चादरें चढ़ा कर मन्नतें मांगी। कहीं मुस्लिम धर्मावलंबी अपने धर्म के अनुसार बाबा का सजदा कर रहे थे तो कहीं हिंदू, सिख, ईसाई, जैन अपने अनुसार बाबा सदन की पूजा करते दिखे। शाम से ही नगर में गाजे-बाजे के साथ बाबा सदन की दरगाह पर चढने वाली चादरों की शोभायात्रा निकलना शुरू हो गई थी।