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खस्ताहाल मार्ग और धूल के गुबारों ने बढ़ाई दूरियां
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मार्ग में बनी आधा दर्जन पुलियां क्षत-बिक्षत, वाहनों की आवाजाही में बन रहीं बाधक
अमर उजाला ब्यूरो
सौंरई (ललितपुर)। सौंरई से जलंधर होते हुए सागर संपर्क मार्ग को जोड़ने वाला रास्ता लंबे समय से बदहाली की दास्तां बयां कर रहा है। किन्तु शासकीय अपेक्षा की बांठ जोह रहे इस मार्ग पर किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की निगाह नहीं है। अगर इस मार्ग का नवीनीकरण होता है तो क्षेत्र की जनता के लिए यह बड़ी सौगात साबित होगी।
जनप्रतिनिधियों ने चुनाव के समय यहां की जनता से लुभावने वायदे तो कर दिये, लेकिन सत्ता पर काबिज होने के बाद इस क्षेत्र की सुध लौटकर नहीं ली। तहसील मड़ावरा अंतर्गत सौंरई जलंधर संपर्क मार्ग बीते कई वर्षों से जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा है। जहां वाहनों का चलना तो दूर पैदल चलना भी जोखिम भरा है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार सालभर यहां से गुजरना किसी चुनौती जैसा होता है। किन्तु बरसात के समय इस मार्ग की दुर्दशा और अधिक बढ़ जाती है। अगर भूल से भी बारिश के सीजन में यहां से बाहनों को निकाल दिया जाए तो लेने के देने पड़ जाते हैं और अधिकतर बाहन इस कच्चे मार्ग में फंसकर रह जाते हैं। वहीं इस मार्ग के मध्य आधा दर्जन पुलियां लगभग दो दशक पहले बनाई गई थी। जो पुलियां अब क्षत-बिक्षत अवस्था में हैं। जैसे तैसे करके अगर लोग निकलते भी हैं तो ये टूटी पुलियां बड़ी चुनौती के रूप में आड़े आती हैं। जिन्हें पार करना लगभग नामुमकिन होता है। ऐसे में लोग अपने बाहनों को पुलिया किनारे स्थित खेतों से होकर निकलते हैं। लेकिन रवि की फसल बुवाई के बाद वाहनों का खेतों से निकलने बाला वैकल्पिक मार्ग भी अवरुद्ध हो जाता है। लोग मजबूरन इस तीन किलोमीटर के मार्ग को तय करने के लिए पिपरट-बम्हौरी कलां से होते हुए पूरे तेरह किलोमीटर का चक्कर लगना होता है। ग्रामीणों ने बताया कि समय बीतते कई बार जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों से मार्ग निर्माण की मांग करते आये हैं। इसके बाबजूद अभी तक हालात जस का तस हैं।
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मार्ग बनने से होगी सुविधा
अगर सौंरई जलंधर संपर्क मार्ग शासन द्वारा पैरवी करके बनाया जाता है तो क्षेत्र की जनता के लिए यह बड़ी सौगात साबित होगी। इससे धौरीसागर, पिसनारी, सकरा, बनगुवां, सीरोन, रजौला, बम्हौरी, सोल्दा सहित आसपास के कई गांवों के लिए सागर, मालथौन, मदनपुर, नाराहट के लिए आवागमन में कम समय और कम खर्चे में सफर आसान व सुबिधाजनक होगा।
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धूमधाम से निकाले जवारे
बार। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कस्बा बार में नवदुर्गा महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। नवमी के अवसर पर सभी मूर्तियों के पास हवन-पूजन किया गया और माता के प्रतीक में बोई जाने वाले जवारे निकाले गए। गांव के सभी मंदिरों में होते हुए भजन कीर्तन करते हुए पूरे गांव में भ्रमण के उपरांत माता के मंदिर पर जाते हैं और वहीं पर देवी देवताओं की सवारी आती है और लोग उनसे फरियाद करके अपनी खेती स्वास्थ्य एवं सुख शांति की फरियाद करते हैं और माता से सुख शांति की प्रार्थना करते हैं। कस्बा बार एवं क्षेत्र के सभी गांव में जवारे निकाली गई और महिलाएं अपने अपने सिर पर माता के प्रतीक जबारो को तालाब पर ले गई और तालाब पर पूजा अर्चना के बाद उन्हें विसर्जन किया गया।
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