डीएम ने रोका यूनिफार्म का भुगतान
- छात्रों को रेडिमेड ड्रेस बांटने पर जिलाधिकारी नाराज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिलाधिकारी की सख्ती के बाद भी स्कूलों में रेडिमेड ड्रेस के वितरण पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पिछले दिनों ब्लाक बिरधा के एक विद्यालय में रेडिमेड यूनिफार्म बांटे जाने पर डीएम ने कार्रवाई करते हुए ड्रेस का भुगतान रोकने के निर्देश बीएसए को दे दिए। इससे शिक्षकों में खलबली देखी जा रही है।
हर साल शैक्षिक सत्र की शुरुआत में परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को यूनिफार्म के दो सेट वितरित किए जाते हैं। इसमें विद्यालय प्रबंध समिति के अंतर्गत क्रय समिति का गठन किया जाता है। एक लाख रुपये से ऊपर की खरीद पर टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यूनिफार्म का एक सैंपल विद्यालय स्तर पर रखा जाता है तो दूसरा बीआरसी पर रखने का नियम है। लेकिन जब यूनिफार्म वितरण की बारी आती है तो सभी नियम कायदे खूंटी पर टांग दिए जाते हैं। वर्तमान में ड्रेस माफिया सक्रिय बने हुए हैं जो कुछ अध्यापकों का सहयोग लेकर अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं। तमाम स्कूलों में छात्र-छात्राएं यूनिफार्म की उखड़ी सिलाई से परेशान हैं तो कइयों की यूनिफार्म शरीर में ढीली पड रही है। पिछले दिनों में जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने स्कूलों में रेडीमेड यूनिफार्म के बंडल होने पर दो आपूर्तिकर्ताओं फर्म के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दे दिए थे। इसके पश्चात ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी को दो ड्रेस आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। कुछ दिनों तक डीएम की कार्रवाई का असर दिखा। उनका ध्यान हटते ही एक बार फिर ड्रेस माफियाओं ने अपनी सक्रियता बढा दी है। गत दिवस ब्लाक बिरधा के एक विद्यालय में रेडीमेड ड्रेस वितरित होने की शिकायत आई तो डीएम ने दोबारा सख्त रुख अपनाते हुए यूनिफार्म भुगतान पर रोक लगा दी।
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कई शिक्षक भी आ चुके लपेटे में
यूनिफार्म वितरण के मामले में कई शिक्षक, शिक्षिकाओं पर विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। अब भुगतान रोकने की कार्रवाई से शिक्षक, शिक्षिकाओं में असंतोष देखा जा रहा है।
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डीएम ने भुगतान रोकने के दिए हैं निर्देश
जिलाधिकारी ने यूनिफार्म में गड़बडी की शिकायत पर भुगतान रोकने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित में पत्र जारी किया जाएगा।
मायाराम
बीएसए
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फर्म बचाने के लिए सक्रिय हुए लोग
जिन फर्मो को काली सूची में डालने के निर्देश जारी हुए थे, अब उन्हें बचाने के लिए कुछ लोग सक्रिय हो गए हैं। जानकार बताते हैं कि यदि कार्रवाई में ढिलाई बरती गई तो इसकी जांच उन अधिकारियों पर पडना तय माना जा रहा है। शायद यही वजह है कि अधिकारी किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करने में लगे हैं।