बारिश ने बंद किए पर्यटन के रास्ते
पंडवन, दूधई व नृसिंह मंदिर के लिए नहीं हुआ सड़कों का निर्माण
प्रस्ताव व एस्टीमेट तक सीमित है विकास
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बारिश होने से जहां आम जनजीवन को गर्मी से राहत मिली है, वहीं जिले के कई पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले कच्चे रास्ते कीचड़ के कारण आवागमन के लायक नहीं बचे हैं। इन तक पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। अफसरों द्वारा पर्यटन विकास के नाम पर तो अनेक प्रस्ताव सरकार के पास भेजे गए हैं पर इन कच्चे मार्गों को पक्का करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यह चार माह तक मुख्य मार्ग से कटेे रहेंगे।
जनपद में स्थित प्राचीन गुप्तकालीन प्रतिमाएं, नौवीं से तेरहवीं शताब्दी के धार्मिक व पर्यटन महत्व के मंदिर, जल प्रपात, प्राचीन स्थापत्य कला, पहाड़ों पर उकेरी गई आकर्षक प्रतिमाएं व पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशीयुक्त कलाकृतियों की यहां के पर्यटन स्थलों को समृद्ध बनाती हैं। पर, इन तक पहुंच मार्गों का अभाव पर्यटकों को इन तक पहुंचने में बाधा बना हुआ है। मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर पाली-बालाबेहट मार्ग पर स्थित दूधई प्राचीन कला बेजोड़ नमूना है। प्राचीन काल में यह समृद्ध व्यापारिक नगर रहा है। यहां प्राचीन प्रतिमाएं व हिंदू मंदिर स्थित है। इस क्षेत्र में लिंग महादेव मंदिर, सूर्य मंदिर, प्रसिद्घ अखाड़ा नाम की गोलाकार संरचना में वर्गाकार कई मंदिर स्थित हैं, जो आकर्षक कला को प्रदर्शित करते हैं। वहीं, दूधई नगर से करीब डेढ़ किलोमीटर जर्जर कच्चे रास्ते से होते हुए, दूसरी ओर करीब पचास मीटर ऊंची पहाड़ी पर 22 से 24 फीट ऊंची भगवान नृसिंह की प्रतिमा भी पहाड़ी पर उकेरी गई है। लेकिन, दूधई मंदिर और पहाड़ी पर स्थित नृसिंह मंदिर तक पहुंचने के लिए आम दिनों में तो किसी प्रकार बड़े या छोटे वाहनों से पहुंचा जा सकता है, लेकिन अब बारिश के दिनों में इन दोनों मंदिरों के लिए जाने वाले कच्चे रास्ते और भी अधिक बदहाल हो गए हैं, हर जगह कीचड़ और गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे इन रास्तों पर ट्रैक्टर के साधन से भी पहुंचना नामुमकिन हो गया है। हर वर्ष बारिश के दिनों में इन पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाले रास्ते बंद हो जाते हैं। मदनपुर से करीब 12 किलोमीटर कच्चे रास्ते से होते हुए सैकड़ों मीटर ऊंची पहाड़ी पर महाभारतकालीन तीर्थ क्षेत्र पंडवन स्थित है। यहां जामनी नदी की ओर सैकड़ों मीटर ऊंचाई पर पहाड़ी के किनारे पांडवों व द्रोपदी के द्वारा स्थापित शिवलिंग स्थित हैं। यहां पर ही एक पहाड़ी के झरने के पानी का एक कुंड भी स्थित है, जिसमें कई प्रकार की जड़ी बूटियां का पानी झरने से गिरता है, ऐसा माना जाता है कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। वहीं, दूसरी ओर बारिश के दौरान जामनी नदी और जंगलों का मनोहारी दृश्य देखते ही बनता है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। बारिश के दिनों में सैलानी दो दूर की बात स्थानीय लोग भी मुश्किल से पहुंच पाते हैं। बारिश के दिनों में इस क्षेत्र में पहुंचने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार मोरंग से रास्ते का निर्माण कराया, लेकिन बारिश के दिनों में मिट्टी धंसने से रास्ता निकलने लायक नहीं रह जाता है। ऐसा ही हाल चांदपुर-जहाजपुर क्षेत्र का है, जहां रेलवे लाइन से दूसरी ओर मंदिरों के लिए जाने के लिए कच्चे रास्ते से ही जाना होता है, हालांकि, यहां जैन मंदिरों के पास तक रास्ता बनवा दिया गया है, जिससे कुछ राहत जरुर है।
इनका कहना है-
पंडवन, बानपुर समेत अन्य पर्यटन क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए सर्वे कराकर प्रस्ताव तैयार कर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा गया है। डीएम द्वारा पर्यटन क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष पैकेज का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
सुबोध कुमार, सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग।