रोज की तरह गुलजार हैं सब्जी मंडी
- जिले में किसान आंदोलन का नहीं दिखा असर
- अन्य जनपदों में भी भेजा जा रहा खरबूजा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। देशभर में कई मांगों को लेकर किसानों के चल रहे आंदोलन का जिले में कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। यहां रोज की तरह सब्जी व नवीन गल्ला मड़ी व बाजार गुलजार है। अन्य जनपदों से फल और सब्जी भी खूब आ रही है। वहीं खरबूूजे का व्यापार भी जनपद से बाहर अन्य राज्यों में किया जा रहा है। हालांकि भारतीय किसान यूनियन ने जरूर कुछ आंदोलन को हवा देने की कोशिश की थी।
पिछले एक जून को भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने बैनर तले संगठन के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा किसानों के हित में सात सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा था। साथ ही किसानों की मांगों के लिए यूनियन के नेतृत्व में जिला किसान पंचायत का आयोजन किया गया था। जिसमें निर्णय लिया था कि उनकी मांगें पूरी न होने के विरोध में किसान अपने उत्पादों को लेकर गल्ला मंडी व बाजारों में बिक्री के लिए नहीं लाएंगे और असहयोग आंदोलन किसानों के द्वारा एक जून से 10 जून तक जारी रहेगा, लेकिन जनपद के फल, सब्जी और गल्ला व्यापारियों के अनुसार इस आंदोलन से यहां कोई फर्क नहीं है। इसका कारण है कि यहां किसानों से जुड़े संगठन तो हैं और वह किसान हित में आए दिन खड़े भी दिखाई देते हैं, लेकिन जनपद में किसान अपने हक के प्रति बहुत अधिक जागरूक भी नहीं है और अधिकांश किसान आंदोलन राजनीति से प्रेरित होने की वजह से आंदोलनों से दूरी बनाए रहते है। जबकि देश के कई राज्यों के बड़े शहरों में कर्ज माफी और उपज के लाभकारी मूल्य को लेकर किसानों के आक्रोशित होने के कारण कई आवश्यक सब्जी, फल व अनाज जैसे जरूरी उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने का संकट गहराने लगा है। हालांकि जनपद में बहुत से किसान जिनकी फसलों तैयार हो चुकी हैं, अधिकांश बाजारों में बिक्री के लिए ला रहे हैं और सब्जियां भी अधिकांश लोकल स्तर पर ही सब्जी मंडी में पहुंचती है। हरी सब्जियां तो कटने के दूसरे दिन ही खराब हो जाती है, जिससे बाजार में नहीं बेचने पर अधिक घाटा सहना पड़ सकता है, इसके चलते किसानों पर आंदोलनों की चेतावनी का अधिक असर दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन यदि अन्य राज्यों व जनपदों में आंदोलन तेज होता है तो इसका दूरगामी असर पड़ सकता है, जो स्थानीय थोक व्यापारी भी मान रहे हैं। इसके साथ ही फल, सब्जियों में आम, तरबूज, केला, अनार, आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर आदि सब्जियों पर कमी के साथ ही महंगाई भी तेजी के साथ बढ़ जाएगी। यहां तक कि कई सब्जियां व फल दोगुुनी और तीन गुनी कीमत पर बेची जाएंगी। इसके बाद सब्जियों व फलों की किल्लत भी हो सकती है। वहीं स्थानीय बड़े स्तर पर उत्पादित ललितपुर का खरबूजा भी झांसी, ग्वालियर, भोपाल, डबरा, जबलपुर, टीकमगढ़, इंदरगढ़, इंदौर आदि बड़े शहरों में भेजा जाता है, यदि आंदोलन को गति मिलती है तो यहां के किसानों का सैकड़ों टन खरबूजा भी खराब होने की संभावना बढ़ जाएगी और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ जाएगा।
फोटो-14
कैप्सन-मोहसिन।
आंदोलन आगे बढ़ा तो दिखेगा असर
ललितपुर में किसान आंदोलन का फिलहाल कोई असर नहीं है, लेकिन यदि आंदोलन आगे बढ़ता तो इसका असर फल व्यापार पर बहुत अधिक पड़ेगा। सब्जियां तो लोकल से अधिक आ रही हैं और आलू, प्याज, व टमाटर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। दामों में भी फिलहाल स्थिरता है। ललितपुर में आम महाराष्ट्र और कानपुर से सबसे अधिक आ रहा है और इनके थोक दाम बीस रुपये से लेकर चालीस रुपये प्रति किलो के हिसाब से हैं।
मोहसिन, आम व्यापारी।
-
फोटो-15
कैप्सन-मोहम्मद नबाब
कोल्ड स्टोरेज होने से असर नहीं
ललितपुर में आलू, प्याज व अन्य सब्जियां व फल आगरा, कानपुर, इटावा, सिरसागंज, फर्रुखाबाद से कोल्ड स्टोरेज से आता है। जिसके चलते फिलहाल सब्जी व फलों पर ज्यादा असर नहीं हैं। लेकिन आंदोलन कितने दिनों तक चलता है और यदि आंदोलन ज्यादा समय तक चला और सप्लाई रोकी गई तो असर अधिक पड़ेगा। फिलहाल एक माह से आलू, प्याज के दामों में स्थिरता बनी हुई है।
मोहम्मद नबाब, सब्जी व्यापारी।
-
फोटो-17
कैप्सन-अशोक अनौरा।
जनपद में कमजोर है किसान आंदोलन
किसान संगठनों की चेतावनी का जिले में कोई असर नहीं है। किसान यूनियन को किसानों पर पकड़ नहीं है और किसान भी अधिक उत्साहित नहीं है। जिसके चलते यहां किसान आंदोलन भी कमजोर है। मंडी में फिलहाल खूब व्यापार चल रहा है।
अशोक अनौरा, अध्यक्ष, गल्ला व्यापार संघ।
-
स्वामीनाथ आयोग की सिफारिशें लागू हो
सरकार से किसान हित में स्वामीनाथ आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की जा रही है। सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान कर्ज में डूबा हुआ है। जिसके चलते सरकार से दुर्घटना बीमा, 60 वर्ष की आयु के किसानों को पेंशन योजना जैसी कई योजना लागू करने की मांग है। 2019 से पहले किसानों की मांगों को पूरा कराए जाने के लिए दिसंबर, जनवरी और फरवरी में वृहद स्तर पर आंदोलन करने की रणनीति तैयार की गई है, जिसमें पूरा उत्तर प्रदेश जाम हो जाएगा।
शिवनारायण सिंह परिहार, बुंदेलखंड अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
-
जिले में विरोध प्रदर्शन जारी
यूनियन द्वारा जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर जिले में गेंहूं, चना, मसूर का वृहद स्तर पर खेती होती है, जो अब बाजार में बेचा जा चुका है, लेकिन यहां दूध और सब्जियों को बड़ा व्यापार नहीं है। उनकी यूनियन किसान हित में अन्य बड़े शहरों में आंदोलन कर रही है।
लाखन सिंह पटेल, जिलाध्यक्ष भाकियू (अराजनैतिक)।