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बोर्ड मूल्यांकन: बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में डीआईओएस ने झोंकी ताकत

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बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में डीआईओएस ने झोंकी ताकत
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ललितपुर।
वर्तमान में चल रहे यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य का माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षकों द्वारा बहिष्कार किया जा रहा है। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कार्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों में दो वर्ष का शैक्षिक कार्य पूर्ण कर चुके समस्त पुरुष व महिला शिक्षकों की ड्यूटी मूल्यांकन कार्य में लगा दी है। अभी तक हाईस्कूल की 20.8 फीसदी और इंटरमीडिएट की 15.8 फीसदी मूल्यांकन हो सका है।
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विगत 17 मार्च से राजकीय इंटर कॉलेज ललितपुर मूल्यांकन केंद्र में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की यूपी बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य शुरू हो गया है। हाईस्कूल की 77 हजार 194 और इंटरमीडिएट की 47 हजार 082 कापियों का मूल्यांकन किया जाना है, इनमें से बृहस्पतिवार तक हाईस्कूल की 16 हजार 074 और इंटरमीडिएट की सात हजार 433 कॉपियां जांची जा चुकी हैं। बृहस्पतिवार को ही जिला विद्यालय निरीक्षक वीरेंद्र कुमार दुबे ने मूल्यांकन केंद्र राजकीय इंटर कॉलेज ललितपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षों में जाकर मूल्यांकन कार्य को परखा और उप नियंत्रक राजेंद्र कुमार त्रिपाठी से मूल्यांकन में परीक्षकों की कमी के बारे में जानकारी ली। हाईस्कूल की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए बोर्ड द्वारा उप प्रधान परीक्षक व परीक्षक के लिए 210 शिक्षकों की तैनाती की गई थी, इनमें से 128 शिक्षक मूल्यांकन में नहीं पहुंचे हैं। वहीं, इंटरमीडिएट की कापियों के मूल्यांकन के लिए उपप्रधान परीक्षक व परीक्षक के लिए 92 शिक्षकों की तैनाती की गई थी, इनमें 46 शिक्षक मूल्यांकन में नहीं पहुंचे हैं। इनमें से बताया जा रहा है इन अनुपस्थित शिक्षकों में अधिकतर शिक्षक माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक है, जो मूल्यांकन का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक ने मूल्यांकन केंद्र हाईस्कूल के माध्यम से 13 परीक्षकों और इंटर में 04 अतिरिक्त परीक्षकों को नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मूल्यांकन केंद्र पर मौजूद राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दि ए हैं कि वह अपने विद्यालयों में तैनात ऐसे शिक्षक जो दो वर्ष का शैक्षिक अनुभव ले चुके हैं, उनके मूल्यांकन कार्य में लगाया जाए। इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि यदि इन अनुपस्थित शिक्षकों में सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक हुए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं उन्होंने बताया कि मूल्यांकन में मेडिकल का बहाना भी नहीं चलेगा। मेडिकल लगाने वाले शिक्षक के मेडिकल का सत्यापन सीएमओ से कराया जाएगा।
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