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अतिक्रमण हटाना तो दूर, मौके पर ही नहीं पहुंची टीम

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अतिक्रमण हटाना तो दूर, मौके पर ही नहीं पहुंची टीम
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
शहर के मुहल्ला आजादपुरा से होकर निकली गोविंद सागर बांध की बायीं नहर के किनारे स्थित जमीन पर काबिज अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू करने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार का दिन तय किया था। लेकिन अतिक्रमण हटाना तो दूर की बात दो दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने के लिए अब तक मौके पर भी नहीं पहुंच पाए हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा तैयारियों को लेकर किए दावे झूठे साबित हुए हैं।
शहर के गोविंद सागर बांध से निकली बायीं नहर जो मुहल्ला आजादपुरा व सदनशाह से होते हुए पिसनारी बाग व हरदीला होते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जाती है। इस नहर के दोनों किनारों पर स्थित सिंचाई विभाग की जमीन पर स्थानीय लोगों के द्वारा अनेकों स्थलों पर अतिक्रमण कर पक्के निर्माण कर लिए गए हैं, इसमें सबसे ज्यादा अतिक्रमण वाला क्षेत्र श्रीतुवन मंदिर के पीछे मुहल्ला आजादपुरा है। यहां पर लोगों ने सिंचाई विभाग की जमीन पर अतिक्रमण करके आलीशान भवन बना लिए हैं। सरकारी जमीनों को कब्जा व अतिक्रमण मुक्त करने के लिए प्रदेश भर में चलाए जा रहे अभियान के तहत सिंचाई विभाग की राजघाट निर्माण खंड इकाई के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार गुप्ता ने नहर किनारे अतिक्रमण करके बनाए गए पक्के निर्माण को ध्वस्त करने के लिए जंग छेड़ी थी और इस जंग का एलान उन्होंने चिह्नित किए गए लगभग 70 अतिक्रमणकारियों को अंतिम नोटिस जारी करके किया था। विभाग द्वारा जारी किए अंतिम नोटिस में कब्जाधारियों को स्वयं से ही अतिक्रमण हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था, जो बीते रविवार तक खत्म हो चुका है। अधिशासी अभियंता अतुल कुमार गुप्ता ने कहा था कि मंगलवार से अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा था कि कार्रवाई के लिए विभाग की ओर से सारी तैयारियां कर ली गई है और ध्वस्तीकरण के लिए कोर्ट से भी अनुमति ले ली है। अंतिम नोटिस की मोहलत भी समाप्त हो चुकी है और मंगलवार बीते हुए भी दो दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी तक विभाग द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। सिंचाई विभाग द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरु हो गई हैं। गौरतलब है कि सिंचाई विभाग नहर किनारे अतिक्रमण के दायरे में बने पक्के निर्माण को ध्वस्त करने की बात कर रही है, वहां पर जनपद के कुछ राजनैतिक नेताओं व पैसों वालों के आलीशान मकान बने हुए हैं।
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सड़क पर बने चबूतरों को तोड़ने में छूट जाता है पसीना
शहर की सार्वजनिक नालियों व रास्तों पर अतिक्रमण बनाए गए चबूतरों को तोड़ने में नगर पालिका व जिला प्रशासन का पसीना छूट जाता है, वहीं सिंचाई विभाग के द्वारा दो से तीन मंजिला बने पक्के मकानों को ध्वस्त करने की बात कही जा रही है, जो अपने आप में सामान्य नहीं है। नहर के किनारे सिंचाई विभाग की जमीन पर तो अवैध निर्माण हुए हैं, वह खुलेआम किए गए हैं। इसमें कुछ वर्षों पुराने है तो कुछ ऐसे भी है जिनका निर्माण हाल ही में हुआ है।
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कुछ साफ नहीं कह सके साहब
अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब तक क्यों शुरू नहीं की गई है, यह जानने के लिए जब सिंचाई विभाग की राजघाट निर्माण खंड इकाई के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार गुप्ता से बात की तो वह इसका जवाब देने में कन्नी काटते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि अभी इस संबंध में डीएम से बात करनी हैं और विभाग की कुछ बातें हैं, जिसे गोपनीय रखा जाता है, लेकिन अतिक्रमण के खिलाफ अभियान अभी जारी है।
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