ललितपुर। स्वयं सहायता समूहों ने शासन प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए स्वरोजगार के कई रास्ते खोल दिए हैं। इसका सीधा फायदा समूहों से जुड़ी महिलाओं को हुआ है।
कोरोना काल में जहां तमाम लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। इस मुश्किल वक्त स्वयं सहायता समूहों ने आगे आकर शासन का साथ दिया। कोरोनाकाल से अब तक जिले की 11 हजार महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। शुरुआत में स्वयं सहायता समूहों ने परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को यूनिफार्म तैयार की। कलक्ट्रेट, तालबेहट व छह ब्लाक में कैंटीन का संचालन किया जा रहा है। मीटर बिल पेमेंट का भी जिम्मा इन्हें सौंपा गया है। इसमें उन्हें एक लाख सैतालीस हजार का डेटा उपलब्ध कराया गया है। बैंक सखी में 27 महिलाएं काम कर रही हैं जो समूहों के बैंक खाते खुलवाने, धन निकासी में मदद कर रही हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। कोटे की दुकान के संचालन के लिए कई महिलाएं आगे आई हैं। कोरोनाकाल में तीन सौ छत्तीस समूहों की महिलाओं ने छह लाख मास्क तैयार किए हैं।
वीसी सखी को काम करने का तरीका समझाने के लिए आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षित महिलाएं आधार बेस छोटे भुगतान गांव में रहकर कर सकेंगी।
रवि दुबे, जिला मिशन प्रबंधक आजीविका
कई समूहों में अशिक्षित महिलाएं हैं जो बेहतर काम कर रही हैं। अन्य महिलाएं भी समूहों से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं।
अभिनव शर्मा, जिला मिशन प्रबंधक आजीविका