ललितपुर। दस महीने में जिला महिला अस्पताल के संपूर्णा क्लीनिक में 1319 महिलाओं में बच्चेदानी की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 72 महिलाओं को बच्चेदानी का कैंसर पाया गया। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालबेहट में 402 महिलाओं की बच्चेदानी की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 31 महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर पाया गया। इस प्रकार दस माह में जिले में कुल 103 महिलाओं को बच्चेदानी का कैंसर मिला है।
जनपद में जिला अस्पताल को स्थापित हुए चार दशक से भी अधिक समय हो गया है। यहां पर शहर के साथ ही सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों केे एक रुपये में सामान्य मर्जों का उपचार तो मिल रहा है, लेकिन अब तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का उपचार नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, इसकी जांच की सुविधा भी नहीं है। इससे इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्थिति गंभीर होने पर मरीज महानगरों की ओर रुख करते हैं। जहां जांच के दौरान पता लगता है कि मर्ज ने गंभीर रुप ले लिया है। नई उम्र के लोगों को इलाज मुहैया होने पर जान बच जाती है, लेकिन वृद्घ उपचार के दौरान ही दम तोड़ जाते हैं।
जिले में दो साल पहले शासन ने महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर, स्तन कैंसर और मुंह के कैंसर की जांच कराने के लिए जिला अस्पताल में संपूर्णा क्लीनिक शुरू किया था। इसमें केवल प्राथमिक स्तर पर होने वाले बच्चेदानी के कैंसर को ठंडी सिकाई के माध्यम से ठीक किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के दस माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।
दस माह में संपूर्णा क्लीनिक में 1319 महिलाओं के बच्चेदानी के कैंसर की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 72 महिलाओं को बच्चेदानी का कैंसर पाया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालबेहट में दस माह में 402 महिलाओं के बच्चेदानी के कैंसर की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 31 महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर पाया गया। इस प्रकार दस माह में जनपद में कुल 103 महिलाओं को बच्चेदानी का कैंसर मिला। इनमें 46 महिलाओं में कैंसर प्राथमिक स्तर पर होने के कारण ठंडी सिकाई करके ठीक कर दिया, जबकि 21 बच्चेदानी के कैंसर से पीड़ित महिलाओं को रेफर किया गया। उनका इलाज चल रहा है।
मरीजों को नहीं मिल पा रहा उपचार
जिले में कैंसर यूनिट के अभाव में कैंसर रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मरीजों को समय पर मर्ज की जानकारी नहीं हो पा रही है।
जनपद में कैंसर के मर्ज की जांच व उपचार की सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों को जांच और उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। केवल महिलाओं की बच्चेदानी के प्राथमिक स्तर पर जांच व सिकाई की सुविधा है।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी