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शहजाद नदी का पुल ढहा, ग्राम पनारी से संपर्क कटा

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नदी उफनाने से शहजाद नदी का पुल ढहा
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मुहल्ला खिरकापुरा का ग्राम पनारी से संपर्क कटा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गोविंद सागर बांध के पानी से उफनाई नदी ने वर्षों पुराने पुल को ध्वस्त कर दिया। इससे मुहल्ला खिरकापुरा का ग्राम पनारी से पूरी तरह संपर्क कट गया। शार्टकर्ट के रूप में इस्तेमाल कर रहे चालकों के लिए परेशानी का सबब खड़ा हो गया।
शहर के बीच निकली शहजाद नदी पर गोविंद सागर बांध बना हुआ है। इस बांध के ऊपरी हिस्से में जोरदार बारिश हुई। परिणाम यह हुआ कि सिंचाई विभाग के अफसरों को बांध के सभी गेट खोलने पड़े। इससे शहजाद नदी में बड़ी मात्रा में पानी आ गया। इस पानी के साथ जलकुंभी सहित घास में बहने लगी। जब जलकुंभी व घास पंचमुखी मंदिर के पास पानी के साथ पहुंची तो पुल के द्वार में जलकुंभी सहित घास फंस गई। यही नहीं, कुछ घास पुल के ऊपर लिपट गई। इससे पुल पर पानी दबाव बढ़ने लगा और देर शाम आखिरकार पुल पानी की तेज धार में ढह गया। नदी में पानी कम होते ही ढहे पुल को देख स्थानीय लोग हक्के-बक्के रह गए। लोगों का कहना है कि बीती शाम एक बाइक सवार की जान जाते-जाते बची। बाइक सवार ढहे पुल से अनजान था और उसने पानी के दौरान पुल से बाइक निकालने की कोशिश की। इस दौरान बाइक सवार नदी में गिर गया। गनीमत यह रही कि बाइक सवार तैरना जानता था, जिससे वह तैरकर नदी से निकल आया। लेकिन बाइक तब निकल पाई जब नदी में पानी कम हुआ। शहजाद नदी का पुल एक तो काफी पुराना था और दूसरा इसकी मरम्मत भी वर्षो से नहीं हुई थी। खिरकापुरा निवासी जगदीश कुशवाहा का कहना है कि नगार पालिका यदि समय रहते नदी से जलकुंभी व घास हटा देती तो शायद पुल ढहने से बच जाता। बीते महीनों में पालिका ने शहजाद नदी की सफाई कराई थी लेकिन सफाई नदीपुरा के इर्दगिर्द रही।
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कैसे मंदिर जाएंगे भक्त?
इस मार्ग पर पंचमुखी मंदिर व बलखंडी मंदिर है। दोनों ही मंदिरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। वहीं, डोल ग्यारस पर मंदिरों से भगवान के विमान में विराजमान होकर विहार करते हैं। अब पुल के क्षतिग्रस्त होने से भक्तों के लिए पूजा-अर्चना की समस्या खड़ी हो गई है।
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