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ट्रांसफार्मर को दी जा रही कूलर की ठंडी हवा

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ट्रांसफार्मर को दी जा रही कूलर की ठंडी हवा
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ट्रांसफार्मर के तापमान नियंत्रण के लिए लिया निर्णय
किसी को 70 तो किसी ट्रांसफार्मर का तापमान 82 डिग्री
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर।
बिजली विभाग द्वारा उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मरों के तापमान नियंत्रण करने के लिए कूलर की ठंडी हवा दी जा रही है। गल्ला मंडी स्थित 66 केवी विद्युत सब स्टेशन में स्थापित पांच एमवीए के तीन और आठ एमवीए के एक ट्रांसफार्मर के माध्यम से आधे शहर व करीब सात दर्जन गांवों को बिजली आपूर्ति देकर घरों को रोशन किया जाता है।
इन दिनों शहर में गर्मी अपने चरम पर है और तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। एक ओर सूर्य की तपन और गरम हवा के कारण जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका प्रभाव मशीनों पर भी पड़ने लगा है। विद्युत सब स्टेशन में स्थापित पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर नंबर एक, दो व चार का तापमान सोमवार को 70 डिग्री तक पहुंच गया, जो गत दस दिनों में चार से पांच डिग्री अधिक है। यहां रखा आठ एमवीए के ट्रांसफार्मर नंबर तीन का ऑयल तापमान भी 70 डिग्री से अधिक और इसमें लगे रेडियेटर का तापमान 82 डिग्री तक पहुंच गया है। यदि यहां लगे सभी ट्रांसफार्मरों के तापमान का आंकलन किया जाए तो ट्रांसफार्मर नंबर दो के पांच एमवीए ट्रांसफार्मर का तापमान शुक्रवार को 70 डिग्री तक पहुंच गया। ट्रांसफार्मर नंबर एक के पांच एमवीए ट्रांसफार्मर का तापमान 60 डिग्री, आठ एमवीए के ट्रांसफार्मर नंबर तीन का तापमान 82 डिग्री और चार नंबर के दस एमवीए ट्रांसफार्मर के ट्रांसफार्मर नंबर चार का तापमान 64 डिग्री तक पहुंच गया। जबकि इन ट्रांसफार्मरों का तापमान कम से कम चार से पांच डिग्री सेल्सियस कम होना चाहिए। एकाएक ट्रांसफार्मर के रेडिऐटर, ऑयल और बाइडिंग का तापमान बढ़ने से ट्रांसफार्मर के डैमेज होने का खतरा अधिक बना रहता है। ऐसे में यदि एक ट्रांसफार्मर भी खराब हो जाता है तो ट्रांसफार्मर खराब होने के साथ ही उससे जुड़े फीडरों की बिजली तो बाधित होती है, साथ ही अल्टरनेट बिजली व्यवस्था करने के लिए कई दिनों तक अन्य फीडरों की बिजली भी प्रभावित हो जाती है, जब वह ट्रांसफार्मर सही नहीं हो जाता। वहीं यदि ऐसी स्थिति में ट्रांसफार्मर बदला जाता है अन्य जनपद से ट्रांसफार्मर आने के दौरान एक सप्ताह तक उस सब स्टेशन के फीडरों की बिजली नया ट्रांसफार्मर बदले जाने तक प्रभावित बनी रहती है। इससे जहां बिजली विभाग को एक ट्रांसफार्मर बदलने में 50 से 55 लाख रुपये तक का नुकसान होता है, वहीं बिजली बाधित रहने से उतने दिनों तक विद्युत उपभोक्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ी रहती हैं। 25 मई से नौतपा शुरू हो गए हैं और शहर का तापमान भी चरम पर है। अचानक से बढ़े तापमान के कारण ट्रांसफार्मर को खराब होने से बचाने के लिए अधिकारियों ने ट्रांसफार्मर के रेडियेटर को कूलर की हवा देना शुरू कर दिया है।
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कर्मचारी कर रहे मशीनों की तपन के बीच काम
उच्च क्षमता ट्रांसफार्मर्स को खराब होने से बचाने के लिए भले ही कूलर की ठंडी हवा देकर तापमान नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा हो, लेकिन, यह बात और है कि गल्ला मंडी सब स्टेशन के कंट्रोल रूम जहां विभिन्न फीडरों की वीसीबी मशीनों की गरमी से काफी गरम हो जाता है। यहां ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को इस भीषण गरमी और वीसीबी मशीनों की तपन के बीच काम करना पड़ रहा है, जिनकी ओर अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। इसके चलते यहां काम करने वाले कर्मचारियों को दिन और रात में पंखे के गरम हवा के बीच ही काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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