चांदमारी को अवैध से वैध बनने की कार्ययोजना में लगे पंख
ललितपुर। चांदमारी पर बसी अवैध कालोनी को वैध बनाने की कार्ययोजना में डेढ़ वर्ष बाद दोबारा पंख लगने शुरू हो गए हैं। प्राधिकरण विभाग ने कालोनी के ले-आउट का नक्शा तैयार कराकर झांसी सहयुक्त नियोजक कार्यालय भेज दिया है। भौतिक सत्यापन के बाद कार्ययोजना शासन की स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। इससे यहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों के घर अवैध से वैध कहलाने लगेंगे और उनको पक्की सड़कें व नाली जैसी अन्य मूलभूत सुविधाएं मिल सकेंगी।
चांदमारी क्षेत्र में वसुंधरा कालोनी पांच-छह एकड़ में बसी हुई है। यहां पर सैकड़ों की संख्या में मकान बने हैं। लेकिन, किसी भी मकान का मानचित्र स्वीकृत नहीं है और कालोनी का लेआउट भी पास नहीं हुआ है। इस कालोनी को प्राधिकरण विभाग द्वारा पूर्व में ही पूरी तरह से अवैध घोषित किया जा चुका है। डेढ़ वर्ष पूर्व मई महीने में नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित बोर्ड की बैठक में इस अवैध कालोनी को विनियमित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद कालोनी के लेआउट का नक्शा बनने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। डेढ़ वर्षों में प्राधिकरण इस कालोनी के लेआउट का नक्शा तैयार करा सका है। विनियमित प्राधिकरण विभाग के अवर अभियंता एसके प्रजापति ने बताया कि विगत रोज चांदमारी के लेआउट का नक्शा प्राइवेट कांपनी द्वारा तैयार करा दिया गया है और यह मानचित्र झांसी मंडल पर स्थित संहयुक्त नियोजक कार्यालय को भेज दिया गया है। अब झांसी की टीम जनपद में आकर नक्शे का भौतिक सत्यापन करेगी। इसके बाद नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित बोर्ड इसको मंजूरी देकर, इस प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए भेजेगा।
प्राधिकरण कराएगा यहां का विकास
चांदमारी कालोनी वैध यानि विनियमित हो जाने के बाद बिना मानचित्र स्वीकृत के अवैध तरीके से बने मकानों से जुर्माना वसूलकर उनका मानचित्र पास किया जाएगा। इसी विकास शुल्क के नाम पर जुर्माना वसूला जाएगा और फिर इसी धनराशि से इस कालोनी का विकास किया जाएगा। वर्तमान में यहां पर पक्की सड़कें, पानी की निकासी की नाली, लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए पाइप लाइन की सुविधा, बिजली की उचित सुविधा नहीं है। इन मूलभूत सुविधाओं के प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। यदि शासन से इस कार्ययोजना को मंजूरी मिलती है तो इससे यहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों का लाभ मिलेगा।
खुद की छिपा रहे गलती
नियमित प्राधिकरण विभाग चांदमारी पर बिना लेआउट व मानचित्र के बसी कालोनी को अवैध से वैध बनाने में जुटा है। इसमें कहीं न कहीं विभाग खुद अपनी ही गलती छिपाते दिखाई दे रहा है। क्योंकि यह अवैध कालोनी प्राधिकरण विभाग के ही कार्यक्षेत्र में और जिला प्रशासन की नाक के नीचे कलेक्ट्रेट से कुछ ही मीटर की दूरी पर बसी है। जब यहां पर बिना मानचित्र स्वीकृति के भवनों का निर्माण कराया गया तो विभाग द्वारा इन अवैध निर्माणों को रोका क्यों नहीं गया। इतने बड़े स्तर पर बनी यह अवैध कालोनी प्राधिकरण विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाते हैं। वर्तमान में ही यहां पर अवैध निर्माण जारी है, जिन्हें विभागीय अधिकारी रुकवाना जरूरी नहीं समझ रहे हैं।