बुंदेलखंड के हर जिले में बनेगा गोकुल ग्राम
अंकित द्विवेदी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अन्ना प्रथा पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के सात जिलों में गोकुल ग्रामों की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए ललितपुर जिले में जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। ललितपुर पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इसके लिए जिले में लगभग पांच सौ एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। इसमें दो हजार गायों का संरक्षण किया जाएगा। इसके अलावा गायों के गोबर व मूत्र के व्यवसायिक उपयोग के लिए प्लांट लगवाए जाएंगे।
केंद्र सरकार ने 28 जुलाई 2014 को राष्ट्रीय गोकुल मिशन कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। इसके तहत अन्ना प्रथा से परेशान क्षेत्रों में देशी गायों का संरक्षण करने के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशु प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत ग्राम स्तर पर गोकुल ग्राम की स्थापना की जानी है। बुंदेलखंड में अन्नाप्रथा की समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में गोकुल ग्राम की स्थापना किए जाने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्रालय की ओर से 2012 में हुई 19वीं पशुगणना के अनुसार बुंदेलखंड में 23 लाख 50 हजार से अधिक गौवंश है। वहीं ललितपुर जनपद में ढाई लाख से अधिक गौवंश है। इसके तहत देश में अभी तक 14 गोकुल ग्राम बनाए जा चुके हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में पहला गोकुल ग्राम मथुरा में बनाया जा रहा है। बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में पीपीपी मॉडल से गोकुल ग्रामों की स्थापना की जाएगी। इसमें पब्लिक की भागीदारी सुनिश्चित होगी। प्रदेश सरकार ने सातों जनपदों के मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर गोकुल ग्राम बनाने के निर्देश दिए हैं।
कैसा होगा गोकुल ग्राम
पशुचिकित्सा अधिकारी ने बताया कि गोकुल ग्राम में दो शेडों में दो हजार देशी गायों का संरक्षण किया जाएगा। इसमें 40 प्रतिशत गायें अनुपयोगी होंगी और 60 प्रतिशत उपयोगी गाय रखी जाएंगी। इनसे निकलने वाले गोबर से बायो गैस प्लांट का निर्माण किया जाएगा। इससे जनरेटर के माध्यम से गोकुल ग्राम में लाइट की व्यवस्था की जाएगी और उससे निकले अवशिष्ट को खाद बनाकर बेचा जाएगा। इसके अलावा गायों के मूत्र के शोधन के लिए प्लांट लगाया जाएगा जिससे शोधित मूत्र को बाजार में बेचा जाएगा। इस गोकुल ग्राम के लिए 500 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी और उसमें गायों के चारे की व्यवस्था और गायों के लिए पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा उपयोगी गायों से निकलने वाले दूध को सुरक्षित रखने के लिए वटर मिल्क कूलर लगवाया जाएगा। इसके अलावा दूध से घी, मक्खन और मिठाई बनाने के लिए प्लांट लगवाया जाएगा। इसके अलावा गायों की देखरेख के लिए एक पशु अस्पताल का निर्माण किया जाएगा। देखरेख के लिए आसपास के गावों से ही मैनपावर की आवश्यकता पूरी की जाएगी।
वर्जन
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गोकुल ग्राम के संबंध में निर्देश मिले हैं। इसके लिए जिलाधिकारी से जमीन उपलब्ध करवाने के लिए कहा जाएगा। जैसे ही जमीन का चिन्हीकरण करके सरकार को बजट के लिए प्रोजेक्ट बनाकर भेज दिया जाएगा।
जीवन दत्त, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी