सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह यादव ने घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 3 अगस्त 2010 को तालाबपुरा निवासी वीरेंद्र यादव व रवींद्र यादव उर्फ रवि, चंचल यादव, रंजीत यादव एवं मीरा यादव पत्नी वीरेंद्र यादव के कहने पर तिलक सिंह यादव निवासी ग्राम बरेना, थाना बालाबेहट ने षड़यंत्र के तहत जाखलौन निवासी भगवान सिंह के लड़के करतार को समझौता के बहाने से तालाबपुरा बुलाया था और उक्त सभी लोगों ने एक राय होकर करतार को पेट्रोल डालकर आग लगाकर जला दिया था। भगवान सिंह ने मुहल्ले वासियों की मदद से किसी प्रकार अपने पुत्र को जली हुई अवस्था में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। करतार सिंह ने जिला चिकित्सालय में तहसीलदार अरुण कुमार श्रीवास्तव को बयान देकर अपने दोनों साढ़ूओं पर पेट्रोल डालकर जलाने का आरोप भी लगाया था। इसके बाद हालत गंभीर होने पर उसे झांसी मेडिकल रेफर कर दिया था, जहां इलाज के दौरान 8 अगस्त 2010 को उसकी मृत्यु हो गई थी। पुलिस यह मामला गैर इरादतन हत्या के तहत पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। गुरुवार को अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) लोकेश राय ने उक्त दोनों आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या में दोष सिद्ध पाया था। शुक्रवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की दलीलों, गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त वीरेंद्र यादव व रवींद्र यादव उर्फ रवि उर्फ रविशंकर को गैर इरादतन हत्या की धाराओं में दोनों दोषियों को सजा सुना दी।