लखीमपुर खीरी। सर्दियां शुरू होते ही बाहर से आने वाली सब्जियों की आवक पर असर पड़ना शुरू हो गया है। इससे उनकी कीमतें बढ़ गई हैं। मौजूदा समय में सीजनल को छोड़कर अन्य तमाम तरह की सब्जियों के भावों में अच्छी खासी वृद्धि हो गई है। इससे गृहिणियों के घर खर्च पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
मंडी के व्यापारियों के अनुसार, सीजनल सब्जियों जैसे मटर, पालक और गोभी को छोड़कर अन्य अधिकांश सब्जियों के दाम पिछले सप्ताह की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। भिंडी, परवल, करेला, कटहल, तोरई, टमाटर और हरी सब्जियों के दाम तो खुदरा बाजार में 20 से 30 प्रतिशत तक उछल गए हैं। लहसुन और प्याज जैसी रोजमर्रा की सब्जियां भी महंगी होती जा रही हैं।
गृहिणियों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है। घरेलू बजट पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। वहीं, परिवार की जरूरतों के अनुसार सब्जियां खरीदना थोड़ा मुश्किल होता दिख रहा है। कई ग्राहक अब विकल्प के तौर पर सस्ती और मौसमी सब्जियों पर निर्भर होने लगे हैं। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि मौसम और आवक में सुधार ही सब्जी बाजार को राहत दे सकता है।
थोक व्यापारियों का दावा... जल्द ही मिल सकती है राहत
-सब्जी का व्यापार करने वाले थोक व्यापारी रफीक का कहना है कि मौजूदा समय में दूसरे प्रदेशों के अलावा स्थानीय किसान भी प्याज और आलू लेकर आ रहे हैं। इससे मूल्यों के पहले के मुताबिक गिरावट भी आई है। मंडी में आलू की कीमत 10 से 12 रुपये किलो पड़ रहा है। बाजार में वह 50 रुपये का तीन किलो तक की कीमत में बिक रहा है। व्यापारी राहुल का कहना है कि सीजनल को छोड़कर अन्य सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी हुई। रोजमर्रा में प्रयोग होने वाला लहसुन मंडी में ही 150 रुपये तक पड़ रहा है। सिराज ने बताया कि आस पास के जिलों से सब्जियां आने पर मूल्यों में कमी आएगी।
फुटकर दुकानों पर बिक रही इस रेट सब्जी
भिंड़ी 120 रुपये किलो
कटहल 80 से 100 रुपये किलो
करेला 100 से 120 रुपये किलो
तोरई 60 से 80 रुपये किलो
धनिया 40 से 50
अदरक 60 से 80
हरि मिर्च 100 रुपये किलो
गाजर 30 रुपये किलो
लहसुन 200 रुपये किलो