बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के कारण पिछले साल पर्यटन-सत्र को बीच में ही बंद करना पड़ा था। कम अवधि के बावजूद पिछले सत्र में सैलानियों की खास कमी नहीं रही। इस निर्धारित समय से 15 दिन पहले पर्यटन-सत्र शुरू हो जाने से दुधवा में सैलानियों के अधिक संख्या में आने से राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है।
वर्ष 2019-20 में कोरोना संक्रमण के चलते 14 नवंबर को शुरू हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के पर्यटन-सत्र को तीन माह पहले 18 मार्च को बंद करना पड़ा था लेकिन 14 नवंबर से 30 जून तक कुल 9,777 देसी-विदेशी सैलानी आए और 26 लाख,39 हजार,399 रुपये का राजस्व आया। जबकि 2018-19 में दुधवा टाइगर रिजर्व को कुल 46 लाख 55 हजार,116 रुपये की आय हुई।
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इस साल 15 दिन पहले ही शुरू हुआ पर्यटन
दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन-सत्र निर्धारित तिथि 15 नवंबर के बजाए इस बार एक नवंबर से ही शुरू हो गया। लॉकडाउन के दौरान कई महीनों तक अपने घरों में कैद रहने से ऊबे हुए लोग दुधवा की ओर निकल पड़े। इस साल 01 नवंबर से 30 दिसंबर तक कुल 4624 सैलानी आ चुके हैं। जबकि इसी अवधि में इस साल डीटीआर के कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) प्रभाग में 4232 सैलानी आ चुके हैं। हालांकि वैश्विक महामारी और अंतरराष्ट्रीय हवाई उड़ानों की सीमित संख्या के चलने से विदेशी सैलानियों की संख्या में कुछ कमी जरूर दिख रही है, लकिन भारतीय सैलानी बड़ी संख्या में आकर दुधवा के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं।
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नए साल में दुधवा के पर्यटन को पंख लगने की उम्मीद
कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान लोगों का प्रकृति के प्रति खास रुझान बढ़ा है। लोग सेहत और शुद्ध वायु के लिए अपना समय अब प्रकृति की गोद में बिताना चाहते हैं। इसलिए नए साल में सैलानियों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
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बीते साल दुधवा ने बहुत कुछ खोया
दुधवा टाइगर रिजर्व में कोरोना काल के चलते जहां पर्यटन में कमी आई वहीं कई बहुमूल्य वन्यजीवों को भी खोना पड़ा। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज में बांकेगंज के निकट हरदुआ गांव के खेत में 11 अगस्त को एक बाघिन का शव मिला था। जिसका शिकार हुआ था। वहीं किशनपुर सेंक्चुरी में 12 नवंबर को एक बाघ ने शावक को मार डाला। कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) की सुजौली और ककरहा रेंज में 23 अप्रैल को मानव-तेंदुआ संघर्ष में एक ही दिन के अंदर दो तेंदुओं की पीट-पीट कर ग्रामीणों ने मार डाला था।
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प्रकृति की अनमोल धरोहर हैं दुधवा के शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीव
दुधवा टाइगर रिजर्व में प्रकृति की गोद में रहने वाले शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीव हरे-भरे और घने जंगल की अनमोल धरोहर हैं। यहां 107 बाघ, करीब 100 तेंदुए, 42 गैंडे, 149 हाथी के अलावा हजारों की संख्या में दुर्लभ प्रजाति के हिरन, सैकड़ों खरगोश, मोर, मगरमच्छ के अलावा शेड्यूल वन की फिशिंग कैट,गिद्ध, लकड़बग्घा, सियार आदि के अलावा हजारों की संख्या में रंग-बिरंगे परिंदे पाए जाते हैं। साथ ही यहां सर्दियों के मौसम में हजारों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर जलाशयों, झीलों, नदियों और तलाबों में हजारों की संख्या में आने वाले रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदे सैलानियों का मन मोह लेते हैं।
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कोरोना योद्धा बने दुधवा के वनाधिकारी और कर्मचारी
कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन से दुधवा का पर्यटन-सत्र पिछले साल बीच में ही रोकना पड़ा था। बावजूद इसके सैलानियों और राजस्व में कोई खास कमी नहीं आई है। इस बीच दुधवा में बंद हुए पर्यटन के बाद जंगल में शिकार और कटान रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई। इससे निपटने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने परवाह किए बगैर स्वयं ही नहीं बल्कि वन कर्मियों को प्रोत्साहित करते हुए वन अपराध रोकने का बीड़ा उठाया। सबसे अच्छी बात है कि इस कोरोना काल में न तो कोई वन्यजीव, सैलानी, अधिकारी और न ही कर्मचारी संक्रमित हुआ। सभी कर्मचारी कोरेेना वारियर्स की तरह अपनी ड्यूटी को अंजाम देते रहे। संवाद