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चितवन में गैंडों की मौत से दुधवा तक दहशत

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दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा। (फाइल फोटो) - फोटो : LAKHIMPUR
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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में लगातार हो रही गैंडों की मौत के बाद अब दुधवा में भी गैंडों की निगरानी बढ़ा दी गई है। पार्क प्रशासन के मुताबिक दुधवा नेशनल पार्क में गैंडे सबसे ज्यादा महफूज हैं, क्योंकि यहां पर उनकी सघन निगरानी होती है।
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दुधवा पार्क प्रशासन के मुताबिक गैंडों के संरक्षण के लिए पहले से ही गैंडा पुनर्वास परियोजना फेज एक और फेज दो संचालित हैं, जिसमें तार फेंसिंग कर गैंडों को रखा गया है। निगरानी हाथियों के जरिये की जाती है तो गैंडों को जरा सी भी परेशानी होने पर महावत पार्क प्रशासन को तुरंत सूचना देता है। जिसके बाद तत्काल पार्क पैनल की चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंचकर गैंडों का उपचार करती है। इस समय दुधवा नेशनल पार्क की दोनों परियोजनाओं में गैंडों की संख्या 42 है।
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सैलानियों को भी रखा जा रहा दूर
बीते दो सालों की बात करें तो गैंडा पुनर्वास परियोजना फेज 2 शुरू होने के बाद से ही सैलानियों को गैंडों से दूर रखा जा रहा है। इस बार तो कोविड-19 की वजह से गैंडा दर्शन ही बंद कर दिया गया है।
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गैंडों की निगरानी के लिए हाथियों के साथ ही चिकित्सक भी लगाए गए हैं। अगर किसी भी गैंडे को कोई दिक्कत होती है तो चिकित्सकों की टीम वहां पहुंचती है और गैंडों का परीक्षण करती है। यहां गैंडे काफी सुरक्षित हैं तथा उनकी लगातार पार्क प्रशासन की तरफ से निगरानी भी कराई जा रही है।
- मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क
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नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में एक के बाद एक गैंडों की मौत से पार्क प्रशासन सकते में
धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में सबसे ज्यादा गैंडे पाए जाते हैं। नेपाल में गैंडों की कुल संख्या 645 है, जिसमें चितवन निकुंज पार्क में ही सन 2015 में हुई गणना के अनुसार 605 गैंडे हैं।
पिछले कई वर्षों से पार्क में गैंडों की लगातार मौत हो रही है, जिसको लेकर पार्क प्रशासन में खलबली मची हुई है। राष्ट्रीय निकुंज तथा वन्य जंतु संरक्षण विभाग के मुताबिक इस वर्ष अगस्त से अब तक चार गैंडे शिकारियों ने मौत के घाट उतार दिए तो 13 गैंडों की अन्य कारणों से मौत हुई।
पार्क संरक्षण विभाग के उपसचिव विष्णु प्रसाद श्रेष्ठ ने बताया कि गत कई वर्षों से बड़ी संख्या में गैंडों की मौत होने पर अध्ययन किया गया है और पार्क क्षेत्र में 60 स्थानों पर जल का भी परीक्षण किया गया है लेकिन इतने गैंडों की मौत की असली वजह क्या है, इस बात का खुलासा अब तक नहीं हो सका है। इसके लिए भारत में भी जांच के लिए सैंपल भेजा गया है।
चितवन पार्क के प्रमुख संरक्षण अधिकृत वेद कुमार ढकाल ने बताया कि गैंडे माइकेनिया और थार्पेनियम प्रजाति की घास को चाव से खाते हैं। पार्क में घास मैदान घटकर जंगल का रूप ले रहे हैं ऐसे में गैंडों को खाने की दिक्कत भी आ रही हैं। स्थापना के समय पार्क में 30 हजार हेक्टेयर घास के मैदान थे जो इस समय घटकर 10 हजार हेक्टेयर बचे हैं। इसके अलावा ताल में भी पानी कम है। चितवन में 200 ताल हैं जिसमें केवल 80 ही संचालित हैं। बताया गया कि इसकी बड़ी वजह बजट की कमी है।
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10 सालों में 200 गैंडों की हो चुकी है मौत
चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में बीते दस सालों में लगभग 200 गैंडों की मौत हुई है। जो अपने आप में चिंता का विषय है। पार्क में सन 2010 में 21, 2011 में 16, 2012 में 10, 2013 में 10, 2014 में नौ, 2015 में 14, 2016 में 25, 2017 में 31, 2019 में 45 और 2020 में 17 गैंडों की मौत हुई है।
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गश्त व पेट्रोलिंग बढ़ाई, पोस्ट चौकियां बढ़ाने पर हो रह विचार
चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा संरक्षण के लिए योजना बनाकर वन तथा वातावरण मंत्रालय ने संसदीय टोली का गठन कर वहां भेजा है, जो छानबीन कर रही है। गैंडों की सुरक्षा को लेकर वन्यजीवों के सुरक्षा संरक्षण में सुरक्षा के लिए पुलिस, अनुसंधान विभाग, खुफिया विभाग के साथ ही स्थानीय लोगों से भी सहयोग लिया जा रहा है। पार्क में 46 वन चौकियां थीं जिसे कोरोना संकट काल में बढ़ा कर 52 कर दिया गया लेकिन गैंडों की मौत के बाद इनकी संख्या और बढ़ाए जाने पर विचार चल रहा है। संवाद
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