ममरी। ग्राम पंचायत इब्राहिमपुर ग्रंट के मजरा सुंदरपुर गांव से सटे पुराने भट्ठे के पास रविंद्र वर्मा के खेत में बाघ के पगचिह्न फिर देखे जाने से वहां के ग्रामीणों में दहशत है। पगचिह्न मिलने की पुष्टि वनकर्मियों ने भी की है।
सुंदरपुर के प्रधान प्रतिनिधि रामकुमार वर्मा, सरदार अंग्रेज सिंह, लालसिंह आदि ने बताया कि सोमवार की रात गांव की आबादी से सटे पुराने ईंट भट्ठे के पास रविंद्र वर्मा के खेत में बाघ शिकार की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। इस दौरान बाघ ने झाले में घुसने और पशुओं पर हमला करने का भी प्रयास किया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ जंगल की ओर चला गया। मंगलवार की सुबह उसके पगचिह्न खेत में बने मिले। जिससे ग्रामीणों और झालावासियों में दहशत है। प्रधान की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने बाघ के पगचिह्न मिलने की पुष्टि कर बताया कि जंगल की दूरी महज एक किमी होने के कारण बाघ शिकार की तलाश में खेत में जा पहुंचा, जिसकी निगरानी कराई जा रही है। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
दुधवा के हथियों संग की कांबिंग
महेशपुर रेंज क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने बाघों को ट्रंकुलाइज करने के लिए हैदराबाद थाना क्षेत्र के बाघ प्रभावित इलाके में दुधवा पार्क से आए हाथियों के जरिये मंगलवार को भी कांबिंग कराई गई। हाथी और वनकर्मियों की टीम गन्ने के आसपास चकरोडों पर गश्त करती रही। बाघ के पगचिह्न कई स्थानों पर बने मिले किंतु बाघ की लोकेशन नहीं मिली।
रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि मंगलवार सुबह नर हाथी सुंदर और हथिनी डायना से अयोध्यापुर, सुंदरपुर, वनबुधेली, बंजारगंज, नरसिंहपुर, बुधेलीनानकार गांव के आसपास और पैदल टीम से परेली, टीकापुर, तिलोकपुर, झारा के पास कांबिंग कराई गई। किंतु बाघ की लोकेशन नहीं मिली। उधर, परेली और बुधेली नानकार के प्रधान बिजेंद्र पटेल और ग्रामीणों का कहना है कि हाथी वाली टीम अभी उन स्थानों तक नहीं पहुंची है जहां बाघ ने 30 दिसंबर को लालबिहारी और रमेश पर हमला किया था। परेलीवासियों का कहना है कि पैदल टीम परेली नहर पुलिया और टीकापुर गांव के पास बने बाघ के पगचिह्नों का निरीक्षण करके और गांव वालों से जानकारी लेकर वापस चली गई जबकि बुधेलीवासियों का कहना है कि गांव के दक्षिण में बाघ के पगचिह्न खेतों में निरंतर देखने को मिल रहे हैं। हाथी आते हैं और चकरोड होकर चले जाते हैं। जबकि बाघ गन्ने के खेत में छिपा है। रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि लोग हाथी को गन्ने में घुसने नहीं दे रहे हैं, क्योंकि उनकी फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
खेत में नौ फुट लंबा अजगर देख भागे मजदूर
गन्ने की छिलाई करते समय अजगर को देख मजदूरों में अफरातफरी मच गई। जिससे मजदूर शोर मचाते हुए भाग खड़े हुए। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने अजगर को पकड़ लिया और उसे परसा के जंगल में ले जाकर छोड़ दिया। वन विभाग के मुताबिक अजगर की लंबाई करीब नौ फुट थी।
कस्बे के ईसानगर निवासी कमल किशोर अवस्थी का ब्लॉक ईसानगर के पास खेत है। जहां मंगलवार दोपहर को मजदूर खेत में खड़े गन्ने की छिलाई कर रहे थे। अचानक मजदूरों की नजर गन्नों के बीच में पड़े अजगर पर पड़ी। इससे मजदूरों में अफरातफरी मच गई। खेत के मालिक ने खेत में अजगर होने की सूचना वन विभाग को दी। सूचना पर वन विभाग की टीम ने अजगर को पकड़कर बोरी में बंद कर दिया और फिर बाद में उसे परसा के जंगल में ले जाकर छोड़ दिया। वन दरोगा लकी सिंह ने बताया कि अजगर की लंबाई करीब नौ फुट और वजन 25 किलोग्राम था।