किशनपुर सेंक्चुरी में बाघ की घेराबंदी किए हाथी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में बाघ को बेहोश करने की कवायद शनिवार को कोहरे की वजह से सफल नहीं हो सकी। सुबह करीब सात बजे बाघ ट्रैंक्युलाइज टीम के सामने तो आया, महावतों ने उसे देखा भी लेकिन घने कोहरे के कारण उस पर निशाना नहीं लगाया जा सका।
किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में शिकारियों के चंगुल से छूट कर और गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए करीब 15 वर्ग किलोमीटर जंगल के दायरे में घूम रहे बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए पिछले 15 दिनों से कोशिश चल रही है। बमुश्किल उसका सटीक सुराग लगाकर घेराबंदी की जा सकी है, लेकिन कभी घनी झाड़ियां, कभी शाम हो जाने तो इस बार कोहरे के कारण बाघ को बेहोश नहीं किया जा सका है। शनिवार सुबह सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी और सर्च टीमों से चंद कदमों की दूरी पर बाघ चहलकदमी करता नजर आया। यह देख वन कर्मियों चेहरों पर मुस्कान आ गई। ट्रैंक्युलाइजर टीम के डॉक्टर आरके सिंह, दया शंकर और सर्वेश राय घने कोहरे के चलते बाघ पर सटीक निशाना नहीं लगा सके। बावजूद इसके सर्च टीमें और दुधवा के प्रशिक्षित हाथी बाघ की लगातार घेराबंदी किए हुए हैं।
सात दिन से किशनपुर सेंक्चुरी में बंद है पर्यटन
बाघ को ट्रैंक्युलाइजर करने के लिए एक सप्ताह पहले पर्यटन बंद कर दिया गया था, जो अभी तक शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में एक सप्ताह से सैलानी किशनपुर सेंक्चुरी के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने से वंचित हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के अभियान में किसी तरह का व्यवधान न पड़े इसलिए पर्यटन रोका गया है।
शनिवार सुबह घना कोहरा छाया रहने के कारण दिखाई पड़ने के बावजूद बाघ को ट्रैंक्युलाइज नहीं किया जा सका। बाघ वन कर्मियों के बनाए घेरे में ही मौजूद है। अवसर की तलाश है। - मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।