किशनपुर सेंक्चुरी में बाघ को बेहोश करने को कैमो फ्लैज व्हीकल को प्राकृतिक रूप देते वन कर्मी । संव
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी में पिछले 22 दिनों से गर्दन में नायलॉन रस्सी का फंदा लिए सर्च टीमों को छका रहा बाघ खोज तो लिया गया,लेकिन वह ट्रैंक्युलाइजर टीमों के हत्थे नहीं चढ़ रहा है।
पिछले तीन दिनों से घेराबंदी कर बैठी ट्रैंक्युलाइजर टीमें बाघ पर निशाना नहीं साध पा रहीं हैं। घनी झाड़ियों के कारण बाघ लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। बाघ की मौजूदगी की सही स्थिति का पता चलने पर टैंक्युलाइजर टीमें और वन विभाग के अफसर तीन दिन से मौके पर डटे हुए हैं। मंगलवार को पूरे दिन की कवायद के बाद भी बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने में कामयाबी नहीं मिली। इसी तरह बुधवार को भी पूरे दिन टैंक्युलाइज टीमें मौके पर डटी रहीं लेकिन बाघ निशाने पर नहीं आया। गुरुवार को भी कुछ यही स्थिति बनी हुई है।
कैमो फ्लैज व्हीकल और मचान से निशाना साधने की कोशिश
किशनपुर सेंक्चुरी में बाघ को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्युलाइज टीमों को दो हिस्सों में बांटा गया है। आधी टीम कैमो फ्लैज व्हीकल में बैठकर बाघ को निशाने पर लेने की कोशिश कर रही हैं,तो दूसरी टीम मचान से मोर्चा संभाले है। बावजूद इसके अब तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है।
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किशनपुर सेंक्चुरी में घेरे गए बाघ को बेहोश करने के लिए टैंक्युलाइजर टीमें मौके पर डटी हुई हैं लेकिन घनी झाड़ियों के कारण बाघ निशाने पर नहीं आ रहा है। उम्मीद है कि जल्दी ही बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने में कामयाबी मिलेगी।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क