किशनपुर सेंक्चुरी में मुस्तैद खड़ी ट्रैंक्युलाइजर टीम। संवाद
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में पिछले 16 दिनों से गर्दन में नायलॉन रस्सी का फंदा लिए जंगल में घूम रहे बाघ ने अपना रुख बदला है। उसकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए लगाए गए कैमरों को तस्वीरों का जब अध्ययन किया गया तो इस बात का खुलासा हुआ।
पार्क सूत्रों का कहना है कि कैमरे में ट्रैप हुई तस्वीरों में बाघ एक वॉटरहोल पर पानी पीता दिखाई दिया है। साथ ही उसके पगचिह्न भी मिले हैं। साथ ही कैमरों में कैद तस्वीरों और वॉटरहोल के आस-पास मिले पगचिह्नों के मिलान करने पर इस बात की पुष्टि हुई कि यह वही बाघ है जिसकी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा है। उधर कैमरे में कैद तस्वीर से बाघ की लोकेशन ट्रेस होने पर सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुुमार के अलावा ट्रैंक्युलाइजर विशेषज्ञ डॉ आरके सिंह, डॉ दया शंकर और डॉ सर्वेश राय बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए अब उसे घेरने में जुटे गए हैं।
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किशनपुर सेंक्चुरी में लगाए गए कैमरों में शुक्रवार को कैद हुई तस्वीर और मिले पगचिह्नों का मिलान करने पर इस बात की पुष्टि हुई है कि यह वहीं बाघ है जिकी गर्दन में रस्सी पड़ी है। बाघ गश्ती टीमों की सामने नहीं आया है इस कारण उसे टैंक्युलाइज करने में दिक्कत आ रही है। अभियान पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।