किशनपुर सेंक्चुरी में कांबिंग करते हाथी, साथ में वन कर्मियों की टीम। संवाद
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए घूम रहे बाघ को तलाशने में अब वैज्ञानिक प्रणाली का सहारा लिया जा रहा है। इस बाघ को गूगल अर्थ एप पर जीपीएस सिस्टम से खोजा जाएगा। पिछले 13 दिनों से लगातार वन विभाग को छका रहा यह बाघ अब तक वन विभाग की नजरों से ओझल है।
किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए पिछले 13 दिनों से घूम रहे इस बाघ को तलाशने में वन विभाग की सारी कवायद विफल रही हैं। अब दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बाद बाघ को गूगल अर्थ एप के माध्यम से जीपीएस सिस्टम के जरिए तलाशने की रणनीति बनाई है। वन विभाग को उम्मीद है कि यह तरीका बाघ खोजने में कारगर होगा। इस सिस्टम के साथ ही कैमरा ट्रैपिंग और पेट्रोलिंग को भी जारी रखा जाएगा। इसी के तहत बुधवार को हाथियों के जरिए पेट्रोलिंग की गई है।
उधर यह बाघ बुधवार को तीसरे दिन भी पेट्रोलिंग टीमों और कैमरों की नजर से दूर रहा। आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में पेट्रोलिंग टीमें लगातार बाघ का सुराग लगाने की कोशिश में जुटी हुई हैं।
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शिकारियों के चंगुल से छूटे बाघ का सुराग लगाने के लिए अब वन विभाग गूगल अर्थ एप पर जीपीएस सिस्टम का सहारा लेगा। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप और पेट्रोलिंग जारी रहेगी।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक,दुधवा टाइगर रिजर्व