बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। कस्बा से सटे जंगल से निकला एक बाघ अचानक गेहूं के खेतों में पहुंच गया, जिसे देख खेतों में गन्ना छिलाई कर रहे किसानों के होश उड़ गए। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ चहलकदमी करता हुआ जंगल की ओर चला गया। लोगों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पगचिह्न देखकर बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की महुरेना बीट से चंद कदमों की दूरी पर स्थिति पसियापुर गांव आबादी से सटे खेतों में सोमवार सुबह नौ बजे जंगल से निकला एक बाघ माइनर नहर के किनारे से होता हुआ गेहूं के खेत में पहुंच गया। बाघ के गुर्राने की आवाज सुनकर खेतों में गन्ना छिलाई कर श्रवण कुमार, कुंभकरण, राम सिंह, सन्नी, अनुज, अनूप आदि ग्रामीणों के होश उड़ गए। शोर मचाने पर बाघ चहलकदमी करता हुआ जंगल की ओर चला गया। इस बीच बाघ को जंगल की ओर जाते वक्त वहां मौजूद युवाओं ने तस्वीर अपने मोबाइल में कैद कर ली। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंचे फॉरेस्टर राजेंद्र कुमार वर्मा ने गेहूं के खेत में पगचिह्न देखकर बाघ आने की पुष्टि की।
महुरेना बीट जंगल से सटे पसियापुर गांव में आबादी के निकट गेहूं के खेतों में एक बाघ पहुंचने की सूचना मिली है। वन कर्मियों की टीम को बाघ की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों से अपील है कि वे सतर्कता बरतें। बाघ दिखने पड़ने पर इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। - केपी सिंह, रेंजर, मैलानी, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
सहजनियां: बाघ के मिले पगचिह्न, दहशत में ग्रामीण
ममरी। मोहम्मदी महेशपुर रेंज के गंगापुर और सहजनिया गांव के बीच खेत में बाघ के ताजे पगचिह्न मिलने से गांव वालों में दहशत का माहौल है। सोमवार सवेरे खेतों की ओर गए ग्रामीणों को गंगापुर, सहजनिया गांव के बीच कठिना नदी से खेत में बाघ के ताजे पगचिह्न मिले, जिन्हें देख गन्ने की छिलाई कर रहे लोग दहशत में आ गए। सूचना पर पहुंचे महेशपुर रेंज के वनरक्षक राजेश कुमार और बाघमित्रों ने पगचिह्नों का निरीक्षण कर बताया कि बाघ शिकार की तलाश में वहां पहुंच गया होगा। पगचिह्नों के आधार पर कहा जा सकता है कि बाघ वापस जंगल चला गया है, फिर भी खेतों में काम करते वक्त सतर्क रहने की जरूरत है।
रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि सहजनिया, गंगापुर, अयोध्यापुर, सुंदरपुर बाघ प्रभावित एरिया घोषित है, जहां हिंसक जीवों की चहलकदमी अक्सर बनी रहती है।
गुलरिया: बाघ को पानी पीते देख दहशत में आए ग्रामीण
गुलरिया। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की पल्हनापुर बीट के अंबारा गांव में रविवार शाम को फिर बाघ दिखाई देने से लोगों में दहशत फैल गई। अंबारा गांव के पूरब सड़क किनारे खेतों में रविवार को इंद्रकुमार अवस्थी अपने खेत में बोई लाही में पानी लगा रहे थे। अचानक गन्ने के खेत से बाघ निकलकर नाली में पानी पीने लगा। बाघ से 70 मीटर की दूर सड़क पर अंबारा के ही उदयभान अवस्थी, कपिल अवस्थी, चंद्रमोहन, इंद्रकुमार आदि बैठे थे। पानी पीने के बाद बाघ चंद्रमोहन के गन्ने के खेत में वापस चला गया।
पल्हनापुर बीट के फारेस्टर अमरपाल सिंह का कहना है कि पल्हनापुर तथा छैरासी दो बीटों का चार्ज है। टीम को मौके पर भेजकर दिखवाता हूं। ग्रामीण खेतों में सावधानी से जाएं और बातचीत करते हुए काम करें, आग का प्रबंध रखें।
गर्दन में नायलॉन की रस्सी लिए जंगल में घूम रहे बाघ का मामला
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिये घूम रहा बाघ पूरी तरह स्वस्थ है और वन कर्मियों को लगातार छका रहा है। बाघ की तस्वीरें लगातार कैमरे में कैद हो रहीं हैं और उसके पगचिह्न भी दिख रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में शिकारियों के चंगुल से छूटकर गर्दन में फंसे फंदे को लिये घूम रहा बाघ सोमवार सुबह सर्च टीमों की नजर में आया लेकिन उसकी घेराबंदी नहीं की जा सकी। पगचिह्नों और कैमरों में ट्रैप तस्वीरों के जरिए उसकी खोज तो कर ली गई लेकिन उसे घेरकर ट्रैंक्युलाइज नहीं किया जा सका। ऊंची घनी झाड़ियों और घास के मैदानों में छिप जाने से उसे ढूंढ़कर घेरना कठिन हो रहा है। सोमवार को सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार ने बाघ को खोजने के लिए ड्रोन कैमरों का भी सहारा लिया। संभावित स्थलों पर ड्रोन उड़ाकर तस्वीरें लेने की कोशिश की गई।
ट्रैंक्युलाइज टीमें मुस्तैद, हत्थे नहीं चढ़ रहा बाघ
डॉ आरके सिंह के नेतृत्व में गठित टीम पूरी मुस्तैदी के साथ बाघ की तलाश करने और और उसकी घेराबंदी करने में लगी हुई है लेकिन बाघ के बार-बार ओझल हो जाने के कारण उसे निशाने पर नहीं लिया जा सका है।
जंगल की भौगोलिक स्थिति चुनौती पूर्ण
किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में बाघ जिस जगह पर मौजूद है वहां की भौगोलिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। घना जंगल होने के साथ ही ऊंची-ऊंची झाड़ियां और घास के मैदान हैं। दूर-दूर तक जंगल फैला होने के कारण बाघ आसानी से लंबी दूरी तय कर लेता है। जिस रफ्तार से बाघ अपनी जगह बदल रहा है उसके आगे वन विभाग की रफ्तार धीमी पड़ रही है।
शिकारियों के चंगुल से छूटकर जंगल में रस्सी का फंदा लिये घूम रहा बाघ अपनी टेरीटरी में ही मौजूद है और सामान्य रूप से शिकार कर रहा है। उसके स्वभाव में भी कोई बदलाव नहीं आया है। फिर भी उसके गले में पड़े रस्सी के फंदे को निकालने के लिए ट्रैंक्युलाइज करने के प्रयास लगातार जारी हैं। - मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क