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स्मॉल कैट्स के लिए जन्नत से कम नहीं दुधवा

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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी) के गन्ने के खेत में मौजूद स्मॉल कैट शावक (फाइल फोटो)। - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। अपनी समृद्ध जैवविविधतता के लिए न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व स्मॉल कैट का सबसे अनुकूल प्राकृतिवास माना जाता है। यह अलग बात है कि बाघों के संरक्षण के आगे स्मॉल कैट्स को सहेजने पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम करने वाली कुछ संस्थाओं ने स्मॉल कैट्स के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है, जिसमें दुधवा टाइगर रिजर्व भी शामिल है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में चार प्रजातियों को स्मॉल कैट्स पाए जाते हैं। जिसमें फिशिंग कैट, जंगल कैट, रस्टी स्पॉटेड कैट और लेपर्ड कैट प्रमुख हैं। लेपर्ड कैट तो आमतौर पर पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व में आसानी से देखे जा सकते हैं लेकिन जंगल कैट, फिशिंग कैट, रस्टी स्पॉटेड कैट भले ही कम दिखाई पड़ते हों लेकिन इनकी संख्या कम नहीं हैं। कई बार खेतों में भी फिशिंग कैट और जंगल कैट अपने शावकों के साथ दिखाई दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों अशोक कश्यप, डॉ वीपी सिंह आदि का कहना है कि किसी भी स्थान की जैवविविधता तभी समृद्ध मानी जा सकती है जब छोटे-बड़े मांसाहारी वन्यजीवों की बाहुल्यता हो। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी, कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) के अलावा बफरजोन में भी बड़ी संख्या में स्मॉल कैट्स पाए जाते हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि हिमालय की तलहटी में स्थिति दुधवा टाइगर रिजर्व की जलवायु और वातावरण स्मॉल कैट्स के संवर्धन के लिए बेहद अनुकूल है। साल, सागौन के घने जंगल, बड़े-बड़े घास के मैदान और पूरे साल पानी से भरे रहने वाले जलाशय भोजन की प्रचुरता स्मॉल कैट्स के लिए अनुकूल प्राकृतवास का निर्माण करते हैं। खीरी जिले का संपूर्ण वन क्षेत्र संरक्षित होने के कारण इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए पहले से ही प्रयास जारी हैं। अब वैज्ञानिक ढंग और योजनाबद्ध तरीके से इनके संरक्षण और संवर्धन की पहल शुरू की गई है।
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यूनाइटेड नेशंस डेवलेपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) के ग्लोबल एनवायरमेंट फैसिलिटी (जीइएफ) के तहत स्मॉल कैट्स के संरक्षण के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व का भी चयन किया गया है। जिसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), ग्लोबल टाइगर फोरम (जीटीएफ) और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) समेत कई संस्थाएं स्मॉल कैट्स के संरक्षण पर योजनाबद्ध ढंग से कार्य करेंगी। इनके संरक्षण और संवर्धन की क्या रणनीति होगी यह दुधवा की परिस्थितियों, वातावरण आदि को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी। संवाद
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