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बाघ दिखने के बाद हरकत में आया वन विभाग

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उल्ल नदी किनारे भीरा-कुकरा रोड पर निगरानी करती वन कर्मियों की टीम। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के जंगल से होकर बहने वाली उल्ल नदी के किनारे इंदिरा नगर गांव में छठ पूजा के समय बाघ के सामने आ जाने के मामले के लेकर वन विभाग सतर्क हो गया है। इसके मद्देनजर बाघ और राहगीरों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।
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बांकेगंज कस्बा से पांच किलोमीटर दूर भीरा-कुकरा रोड पर हर समय चौपहिया, दोपहिया वाहनों के अलावा साइकिल सवारों का आवागमन रहता है। ऐसे में बाघ के सड़क पर आ जाने से किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, जंगल से गुजरने वाली सड़कों पर वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है, लेकिन वाहन चालक बैरियर से निकलते ही रफ्तार पकड़ लेते हैं। इससे कई बार वन्यजीव वाहनों की चपेट में आकर या तो जख्मी हो जाते हैं या मौत का शिकार होते जाते हैं। जंगल की इन सड़कों पर बाघ, तेंदुए जैसे हिंसक जानवरों के हमले का डर भी बना रहता है।
वन विभाग को आशंका है कि बाघ उल्ल नदी के किनारे ही आसपास मौजूद है। यह इलाका बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतवास माना जाता है। ऐसे में यह बाघ सड़क पर न आने पाए इसकी कोशिश की जा रही है। रेंजर मैलानी केपी सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की एक टीम लगातार गश्त कर सड़क की सुरक्षा में लगी हुई है। बाघ की लोकेशन पता चलने पर उसके शिकार का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में वन विभाग बाघ की सुरक्षा के लिए भी पूरी तरह मुस्तैद है।
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इंसेट
छठ पूजा स्थल से महज 40 मीटर दूरी पर खड़ा था बाघ
उल्ल नदी किनारे शुक्रवार शाम छठ पूजा के दौरान बाघ को ठीक सामने देखने वाली इंदिरा नगर गांव निवासी श्रद्धालु महिलाओं प्रेमा देवी, चलौती देवी, गुड्डी देवी आदि ने बताया कि अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते समय बाघ के गुर्राने की आवाज सुनकर जब सामने देखा तो महज 40 मीटर दूर नदी के दूसरे किनारे पर बाघ शांत भाव से खड़ा था। जिसे देखकर हम सब के होश उड़ गए। अनायास ही सबकी चीख निकल गई, लेकिन बाघ कोई प्रतिक्रिया किए बिना धीमे कदमों से सड़क से जंगल में चला गया।
वर्जन
मैलानी रेंज जंगल से गुजरी उल्ल नदी किनारे छठ पूजा के दौरान महिलाओं के सामने बाघ आ जाने के बाद पास से गुजरने वाली भीरा-कुकरा सड़क पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। मैलानी और भीरा रेंज वन कर्मियों की टीमों को 24 घंटे बारी-बारी से बाघ और राहगीरों की सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
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-डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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