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धौरहरा से 150 किमी दूर दुधवा में तेंदुए को मिली पिंजड़े से रिहाई

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धौरहरा में पकड़े गए तेंदुए को दुधवा जंगल में मिली रिहाई। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज। जिले की धौरहरा रेंज में दो बच्चों और कई पशुओं को मौत के घाट उतारने वाले तेंदुए को 47 दिन बाद पिंजरे में कैद किया गया था। गुरुवार रात नौ बजे तेंदुए को दुधवा के घने जंगल में आजाद कर दिया गया।
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तेंदुए को ट्रक से दुधवा नेशनल पार्क की उत्तरी सोनारीपुर रेंज ले जाया गया। जहां वनाधिकारियों की मौजूदगी में उसे जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए आजाद कर दिया गया। इस मौके पर दुधवा और धौरहरा के वनाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। संवाद
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तेंदुआ पकड़ने के बाद
भी सतर्क है वन विभाग
ईसानगर/धौरहरा। वन रेंज की गनापुर बीट घाघरा नदी के कछार क्षेत्र में स्थित गांव बेलागढ़ी में करीब डेढ़ माह से दहशत फैलाए तेंदुआ बुधवार रात बनटुकरा गांव के पास लगे पिंजड़े में कैद हो गया था, बावजूद इसके एक और तेंदुआ होने की आशंका को देखते हुए वन विभाग की कांबिंग जारी है।
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ईसानगर विकास खंड की चार ग्राम पंचायतें ओझापुरवा, बेलागढ़ी, कैरातीपुरवा, चकदहा का इलाका घाघरा नदी के कछार का है। जंगल का किनारा और भौगोलिक परिस्थिति अनुकूल होने के चलते इस इलाके में जंगली जानवरों का आतंक हमेशा बना रहता है। करीब डेढ़ माह में दो बच्चों सहित दर्जनों मवेशियों व कुत्तों को तेंदुए ने हमला कर मार दिया था। वन विभाग ने 16 कैमरों सहित घटना स्थल के आसपास चार पिंजड़े लगाए। कैमरों में दर्जनों बार तेंदुए की फुटेज रिकॉर्ड हुई। वन विभाग ने इलाके में नर तेंदुआ होने की पुष्टि की। बुधवार रात बनटुकरा गांव के निकट पिंजड़े में तेंदुआ कैद हो गया। पिंजड़े में कैद हुआ तेंदुआ मादा होने के कारण वन विभाग अब भी एक और तेंदुआ होने को लेकर आशंकित है। वन विभाग ने पुन: कैमरे एक्टिव कर कांबिग शुरू कर दी है। वन विभाग का मानना है कि मादा तेंदुए के साथ नर तेंदुआ भी इलाके में मौजूद हो सकता है लिहाजा सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। संवाद
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