कार्यशाला में फील्ड स्टाफ को जानकारी देते डब्ल्यूटीआई के प्रशिक्षक। संवाद
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बांकेगंज। वन्यजीव अपराध नियंत्रण को लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व में कार्यशाला हुई, जिसमें वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया के प्रशिक्षक और वन विभाग के विधि विशेषज्ञों ने वनाधिकारियों और फील्ड स्टाफ को वन्यजीव अपराध नियंत्रण और विवेचना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
इस चार दिवसीय कार्यशाला में बुधवार डब्ल्यूटीआई के प्रोजेक्ट हेड/ एडवाइजर प्रेमचंद्र पांडेय ने फील्ड स्टॉफ को बताया कि शिकार, वन्यजीव अंगों की तस्करी आदि वन्य अपराधों पर कैसे नियंत्रण किया जाए। अपराधियों के पकड़े जाने और वन्यजीव अंगों की बरामदगी होने पर किस तरह विवेचना की करनी है। वन्यजीव अंगों की पहचान और उसकी फोरेंसिक जांच के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
कार्यशाला में वन विभाग के विधि विशेषज्ञों राकेश राय और संजय श्रीवास्तव ने फील्ड कर्मचारियों को भारतीय वन्यजीव अधिनियम और उसकी विभिन्न धाराओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने वन्यजीव अपराधों के मामले में विभिन्न धाराओं में केस काटने और विधिक कार्रवाई के संबंध में बताया, ताकि अपराधी पर प्रभावी कार्रवाई हो सके। कार्यशाला में टीसीए (टरटल सर्विलांस एलाइंस ) के डॉ सौरभ दीवान ने फील्ड स्टॉफ को सर्विलांस के जरिए कछुओं की तस्करी रोकने से लेकर उनकी विभिन्न प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वन अपराध विशेषज्ञ मोनेश सिंह तोमर और फोरेंसिक एक्सपर्ट प्रशांत कुमार ने वन अपराधों की बदलती प्रवृति के बारे में बताया। कार्यशाला के दौरान वन्यजीव अपराध नियंत्रण की मॉकड्रिल कराई गई। जिसमें वन विभाग के फील्ड कर्मचारियों ने हिस्सा लेकर अपराध अनुसंधान की बारीकियां समझीं। इस मौके पर डीडी दुधवा मनोज सोनकर, फॉरेस्टर आकाश खरवार, राजेश दीक्षित, शरद मिश्रा, राधेश्याम, मोहित, विजेंद्र सिंह, शिव बाबू सरोज आदि मौजूद रहे। संवाद