धौरहरा। तराई क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुके तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने नया तरीका निकाला है। लखनऊ से मादा तेंदुए का मूत्र लाया गया है, जिसे लगाए गए तीनों पिंजड़ों पर वन विभाग ने स्प्रे किया है। इसके बाद टीमें पिंजड़ों की निगरानी कर रही हैं।
वन रेंज के चमारनपुरवा और साहबदीनपुरवा गांव में दो बच्चों को मारने वाला तेंदुआ एक महीने से वन विभाग को खूब छका रहा है। वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए नए नए प्रयोग कर रही है। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह के निर्देश पर 15 नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे और तीन पिंजड़े भी लगाए, लेकिन तेंदुआ लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। वन विभाग पिंजड़ों के अंदर और बाहर बकरियां भी बांध चुका है पर कोई नतीजा नहीं निकला है। रेंजर अनिल शाह ने लखनऊ चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉक्टर उत्कर्ष शुक्ला से परामर्श कर तेंदुए को आकर्षित करने के लिए वहां से मादा तेंदुए का मूत्र मंगवाकर पिजड़ों पर स्प्रे किया है। साथ ही बकरी भी बांधी हैं। वन विभाग का मानना है कि इससे तेंदुआ आकर्षित होकर पिंजड़े में जरूर आएगा। संवाद