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नदी-नालों से निकल रहे मगरमच्छ फैला रहे आतंक

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Wild Animals
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लखीमपुर खीरी। नदी और नालों से निकल कर आबादी में पहुंच रहे मगरमच्छों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं और दहशत के साए में रात जागकर बिता रहे हैं। यही नहीं नदी और तालाबों के किनारे रह रहे लोगों के बच्चे शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते हैं।
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नेपाल सीमा से सटे लखीमपुर जिले का अधिकतर भू-भाग वनों से आच्छादित है। यहां कई नदियां दुधवा नेशनल पार्क और कतर्निया वन्य जीव विहार से निकलतीं हैं। दुधवा नेशनल पार्क से उत्तर निघासन और बेलरायां रेंज के तहत निकली सुहेली और जौरहा नदी को वनविभाग ने मगरमच्छ जोन घोषित कर रखा है। इन नदियों में बड़ी संख्या में मगरमच्छ पाए जाते हैं। बरसात के समय नदियों और नालों के उफान से आई बाढ़ से मगरमच्छ गांवों में पहुंच जाते हैं। पलिया, तिकुनियां, बेलरायां, निघासन, धौरहरा, मैलानी में मगरमच्छों के हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसी क्रम में तालाब से निकले मगरमच्छ ने 25 अगस्त को हमलाकर पलियाकलां क्षेत्र के गांव बसंतापुर के मजरा बुद्दापुरवा निवासी राजेश कुमार वर्मा (37) को घायल कर दिया था।
कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र में दो दिन पहले मोहाना नदी से निकला मगरमच्छ पड़ोस के गांव रननगर निवासी नरेंद्र सिंह के घर में घुस गया। गनीमत रही कि नरेंद्र ने उसे आधी रात को देख लिया। बाद में वन विभाग की टीम ने अगले दिन इसे पकड़ कर छोड़ा।
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बेलाकलां नाले में मगरमच्छों का है डेरा
मझगईं बेलाकलां गांव में मगरमच्छों का आतंक लगातार जारी है। एक माह पूर्व युवक की जान लेने के बाद मगरमच्छ ने पानी पीने गईं दो गायों को भी मार डाला था। कई बंदर को भी मगरमच्छ मार चुका है। इसके बाद भी वन विभाग ने कोई कारगर कदम नहीं उठाया है।
कुशमौरी के तालाब में पहुंचे मगरमच्छ
करीब 20 दिन पहले ब्लॉक बांकेगंज की ग्राम पंचायत कुशमौरी में उल्ल नदी के किनारे गोवंश आश्रय स्थल के निकट तालाब में मगरमच्छ पहुंच गए थे। एसडीएम अखिलेश यादव ने वन विभाग को मगरमच्छों को तालाब से पकड़कर नदी में छोड़ने के निर्देश दिए थे।
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