फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदल रहा तेंदुओं का स्वभाव, इंसानों पर कर रहे हमले

विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। तराई के तेंदुओं का स्वभाव बदल रहा है। आम तौर पर इंसानों से डरने वाले तेंदुए अब हमला कर रहे हैं। तेंदुओं के बदलते स्वभाव के वनाधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ भी हैरान हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला रेंज में पिछले दो माह के अंदर पांच लोग तेंदुओं का शिकार हो चुके हैं। जब वन विभाग के अधिकारियों ने छानबीन की तो पता चला कि तेंदुआ ही लोगों की जान ले रहा है।
विज्ञापन

दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय विस्वाल का कहना है कि तेंदुए आम तौर से बाघों से दूर जंगल के बाहरी इलाकों में रहा करते थे। जंगल के बाहरी किनारों के अलावा आबादी से दूर जंगल के आसपास बागों और झाड़ियां तेंदुओं का प्राकृतवास हुआ करता था। बाघों की आबादी बढ़ने से बाघ अब जंगल के अंतिम सिरे तक ही नहीं गन्ने के खेतों तक में अपनी टेरीटरी बना रहे हैं। तेेंदुओं का स्वभाव बदलने के पीछे विशेषज्ञ तेंदुओं का प्राकृतवास और भोजन छिनना मान रहे हैं। साथ ही इसे मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
वनाधिकारियों का कहना है संरक्षण के प्रयासों के चलते तराई के जंगल में बाघों की ही नहीं तेंदुओं की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इससे इन्हें अपने रहने के नए ठिकाने तलाशने पड़ रहे हैं। जंगल किनारे गन्ने की फसल तैयार होने से बड़ी संख्या में बाघों ने जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में डेरा डाल दिया है। अब तेंदुए बाघों से दूर हटकर उनकी पहुंच से दूर अपना बसेरा बना रहे हैं। यही कारण है मानव वन्यजीव संघर्ष के लिहाज से सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में तेंदुओं के हमले बढ़ रहे हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग का गोला रेंज मानव वन्यजीव संघर्ष के लिहाज से काफी महफूज था लेकिन अब वहां बाघ और तेंदुए के हमले बढ़ रहे हैं।
विज्ञापन

तेंदुआ छोटे पशुओं का करता है शिकार
डीएफओ संजय विस्वाल ने बताया कि तेंदुआ आम तौर पर हिरन, बकरा, भेड़, कुत्ते और गाय, भैंस, घोड़े, गधे के बच्चों को अपना निवाला बनाता है। तेंदुआ बहुत ही फुर्ती से और चुपके से अपना शिकार करता है। इंसानों का शिकार तेंदुआ विशेष परिस्थितियों में ही करता है। आबादी के निकट आने पर बच्चों के लिए खतरा बन जाता है लेकिन इधर तेंदुए लगातार इंसानों पर हमला कर रहे हैं जिससे वनाधिकारी हतप्रभ हैं।
गोला रेंज में दो माह के अंदर तेंदुआ और बाघ ने लीं पांच जानें
गोला वन रेंज की पश्चिमी बीट में 13 अगस्त को शौच को गए पुनर्भूग्रंट निवासी 32 वर्षीय मूकबधिर युवक मुशर्रफ को बाघ ने अपना निवाला बनाया।
24 अगस्त को जमुना बाद फार्म में बक्खारी गांव निवासी चौकीदार हरीराम का शव क्षत-विक्षत अवस्था में झाड़ियों में पड़ा मिला था। इसे तेंदुए ने हमलाकर मार डाला था।
चार अक्टूबर को जमुनाबाद फार्म के प्रखंड तीन में चौकीदार यदुनाथ को तेंदुए ने निवाला बनाया।
17 अक्टूबर की रात रसूलपुर गांव निवासी 30 वर्षीय रमाकांत को तेंदुआ अपना निवाला बनाया।
20 अक्टूबर को जमुनाबाद फार्म के निकट बजाज चीनी मिल के फार्म पर ट्यूबवेल चौकीदार 50 वर्षीय हीरा लाल को ट्यूबवेल की छत से खींच कर निवाला बनाया।
फार्म हाउस से कीमती पालतू कुत्ते को खींच ले गया तेंदुआ
बिजुआ। भीरा रेंज के मूड़ाबुजुर्ग गांव में बुधवार शाम को फार्म हाउस में घुसकर तेंदुआ पालतू कुत्ते को उठा ले गया। हरभजन सिंह ने फार्म हाउस की रखवाली के लिए हाल ही में 50 हजार रुपये का एक कुत्ता खरीदा था। वह इसे दिन दिन में बांधकर रखते थे और शाम को खोल देते थे। बुधवार की शाम को कुत्ता घर के सामने बैठा हुआ था। अचानक तेंदुआ दौड़ता हुआ आया और कुत्ते को उठाकर गन्ने के खेत में भाग गया। फॉरेस्टर मोहम्मद उमर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तेंदुए की निगरानी में टीम लगी हुई है।
‘गोला रेंज में तेंदुए जिस तरह इंसानों पर हमला कर रहे है। वह तेंदुओं के स्वभाव के विपरीत है। तेंदुओं के स्वभाव में आ रहे बदलाव को लेकर विशेषज्ञ भी हैरान हैं।’
विज्ञापन

- संजय विस्वाल, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें