बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। बरेली की रबर फैक्टरी से टैंक्युलाइज कर लाई गई बाघिन ‘शर्मीली’ को दुधवा के जंगल में शुक्रवार रात छोड़ दिया गया। पिंजड़े का दरवाजा खुलते ही शर्मीली ने एक लंबी छलांग लगाई और देखते ही देखते जंगल में घुसकर आंखों से ओझल हो गई। जंगल में छोड़ने से पहले डॉक्टरों ने शर्मीली का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया।
बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में पिछले करीब सवा साल से वन विभाग को छका रही बाघिन को आखिर शुक्रवार को ट्रैंक्युलाइज करने के बाद पिंजड़े में कैद कर लिया गया था।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) की अनुमति के बाद शर्मीली को पिंजड़े समेत एक ट्रक से दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में लाया गया। जहां डॉक्टरों ने शर्मीली का बारीकी से स्वास्थ्य परीक्षण किया। उसके पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे सोनारीपुर रेंज में छोड़ दिया गया। इस मौके पर दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक, दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल, एसडीओ सीपी सिंह, रेंजर गिरधारी लाल के अलावा डब्ल्यूटीआई और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ मुदित गुप्ता, पार्क के डॉक्टर दया शंकर, डॉक्टर दक्ष आदि मौजूद रहे।
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सवा साल पहले किशनपुर सेंक्चुरी से भागकर पहुंच गई थी बरेली
बाघिन करीब सवा साल पहले किशनपुर सेंक्चुरी से भागकर बरेली में बंद पड़ी रबर फैक्टरी पहुंची थी। उसे वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे लेकिन बंद पड़ी रबर फैक्टरी में उगी झाड़ियां और झाड़-झंखाड़ के कारण बाघिन पर काबू नहीं पाया जा पा रहा था। अनुकूल प्राकृतवास मिलने पर इस बाघिन ने रबर फैक्टरी में ही अपना आशियाना बना लिया। इस बीच बाघिन को ट्रैंक्युलाइज कर वापस किशनपुर सेंक्चुरी लाने के प्रयास जारी रहे। इस प्रयास में कई विशेषज्ञ समेत दुधवा टाइगर रिजर्व टीम की मदद ली गई लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। बृहस्पतिवार को यह बाघिन शीरा भरने के टैंक में घुस गई। तब वन विभाग ने रणनीति बनाकर घेराबंदी की और उसे टैंक्युलाइज करने में कामयाबी हासिल कर ली।
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तीन साल पहले ‘चंदू’ को छोड़ा गया था दुधवा के जंगल में
करीब तीन साल पहले पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र में उत्पात मचाने वाले नर बाघ चंदू को भी दुधवा लाया गया था। उसे जंगल में छोड़ने से पहले कॉलर आईडी भी लगाई गई थी। जिससे उसकी लोकेशन लगातार मिलती रही थी लेकिन करीब दो साल पहले उसकी लोकेशन मिलना अचानक बंद हो गई। तब से अब तक उसका कोई पता नहीं है। चंदू की आखिरी लोकेशन नेपाल में मिली थी।
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बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में सवा साल तक वन विभाग को छकाने वाली बाघिन शर्मीली को टैंक्युलाइज कर दुधवा लाया गया था। जिसे स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दुधवा के जंगल में छोड़ दिया गया है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व