परिषदीय और शासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों में मिडडेमील बनाने के लिए प्रयोग किए जा रहे गेहूं और चावल की क्वालिटी बेहद खराब पाई गई है, जिसे लैब रिपोर्ट में असुरक्षित करार दिया गया है। जांच में गेहूं और चावल के नमूनों में लार्वा और कीड़े पाए गए हैं। खास बात यह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गेहूं और चावल मनुष्यों के खाने योग्य नहीं है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी डॉ अमर सिंह वर्मा ने आगे की कार्रवाई के लिए मामले की रिपोर्ट डीएम और बीएसए को भेजी है।
एफएसडीए टीम ने 24 अप्रैल 2015 को फूलबेंहड़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुंवरापुर से चावल का सर्विलांस नमूना भरा था। इसी दिन कुंभी क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय छितौनिया से गेहूं का नमूना लिया गया था। करीब साढ़े तीन महीने के बाद आई लैैब रिपोर्ट ने स्कूलों में मिडडेमील के लिए सप्लाई किए जा रहे अनाज की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। इससे बच्चों की सेहत के साथ हो रहे खिलवाड़ से पर्दा उठ गया है। लैब रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं और चावल के नमूने अधोमानक होने के साथ ही असुरक्षित पाए गए हैं, जिससे सरकारी तंत्र की लापरवाही सामने आ गई है। पहले भी मिडडेमील की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अनाज ही मानकों की कसौटी पर फेल हो गया है। लिहाजा इससे बनने वाले भोजन की गुणवत्ता कैसी होगी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। यह सर्विलांस नमूने होने के कारण एफएसडीए विभाग कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता है। लिहाजा ऐसा घटिया अनाज सप्लाई करने वाली संस्था के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अब गेेंद डीएम और बीएसए के पाले में पहुंच गई है।
अभिहित अधिकारी, एफएसडीए डॉ अमर सिंह वर्मा ने बताया कि गेहूं और चावल के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं, जो खाने योग्य नहीं है। सर्विलांस नमूने होने के कारण इस मामले में एफएसडीए द्वारा कोई लीगल कार्रवाई नहीं की जा सकती है। इस मामले की रिपोर्ट डीएम और बीएसए को दी गई है।
प्रधान के नौकर ने पानी में मिलाया दूध, नमूना भरा
लखीमपुर खीरी। दूध में पानी मिलाने की बात तो सबने सुनी होगी, लेकिन एक स्कूल में बच्चों को दूध के नाम पर पानी में दूध मिलाकर देने का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद एफएसडीए टीम ने बुधवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय सुंदरवल से दूध का नमूना लिया है, जिसे जैब जांच के लिए भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी एके पाठक ने बताया कि पानी में दूध मिलाकर बच्चों को दिया गया, जिसमें चीनी भी नहीं डाली गई थी। ग्राम प्रधान के नौकर ने स्कूल में दूध की सप्लाई की थी।