फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lakhimpur Kheri News: पानी बढ़ा तो छूट गए घर, मंडी समिति में कट रही रातें

Wed, 02 Sep 2026 11:53 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
घर से सामान निकलते सर्वेश और दिनेश।संवाद - फोटो : सांकेतिक
विज्ञापन
निघासन। घरों में पानी घुसा तो जसनगर और नया पिंड के करीब 35 परिवारों को आशियाना छोड़ना पड़ा। बच्चों, सामान और मवेशियों को लेकर परिवार सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकले।
विज्ञापन

फिलहाल ज्यादातर परिवार तिकुनिया मंडी समिति में शरण लिए हुए हैं। कुछ परिवारों ने सरकारी स्कूलों में जगह ली है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत के नाम पर उन्हें सिर्फ लंच पैकेट मिल रहे हैं। वह भी नियमित नहीं।
जसनगर में पानी बढ़ने के बाद एसडीएम यदुवीर सिंह, तहसीलदार और नायब तहसीलदार राजस्व टीम के साथ गांव में कैंप कर रहे हैं। टीम ग्रामीणों को घर खाली कराकर सुरक्षित स्थानों पर भेज रही है। ग्रामीण फूलमती ने बताया कि परिवार और बच्चों के साथ सामान व मवेशियों को लेकर घर छोड़ना बेहद मुश्किल है। सर्वेश, दिनेश, सीताराम, सुनीता और चंदन कुमार ने बताया कि करीब 20 दिन में उन्हें केवल दो बार लंच पैकेट मिला है। कभी भोजन मिलता है तो कभी नहीं।
विज्ञापन


मंडी समिति में शरण, सुविधाओं की कमी
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों के लिए निघासन तहसील, तिकुनियां मंडी परिसर, रामाधीन इंटर कॉलेज बम्हनपुर, पंचायत भवन लुधौरी, खैरटिया, उच्च प्राथमिक विद्यालय कड़िया और संविलियन विद्यालय मंझरा पूरब में राहत शिविर बनाए हैं। फिलहाल विस्थापित ग्रामीणों को मुख्य रूप से तिकुनिया मंडी समिति में ठहराया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक मंडी समिति में फर्श पर बिस्तर, पर्याप्त रोशनी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। महिलाओं और बच्चों के लिए अलग व्यवस्था भी नहीं है। पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप ही सहारा है। सोमवार को जसनगर में राजेश्वर सिंह की ओर से राहत किट भी वितरित की गई।
-
शारदा का पानी दो दर्जन गांवों तक पहुंचा
शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से सुरजी, पूर्व धौलतापुर, खमरिया, बैला, तमोलिन पूर्व, जमालपुरवा, जीतपुरवा और ठाकुर पूर्व समेत करीब दो दर्जन गांवों में पानी पहुंच गया है। कई परिवार घरों में पानी घुसने के बाद जरूरी सामान और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
-
नाव और इलाज की भी चिंता
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए पर्याप्त नावों की उपलब्धता को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पानी बढ़ने पर जरूरत के मुताबिक नाव नहीं मिली तो बड़ी परेशानी हो सकती है। मेडिकल टीमों की नियमित मौजूदगी और जरूरी दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी ग्रामीण चिंतित हैं।
-
जसनगर के लोगों को तिकुनिया मंडी समिति और सरकारी स्कूलों में भेजा जा रहा है। वहां उनके रहने और खाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन की टीम लगातार प्रभावित गांवों में मौजूद है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
विज्ञापन

- यदुवीर सिंह, एसडीएम

घर से सामान निकलते सर्वेश और दिनेश।संवाद- फोटो : सांकेतिक

घर से सामान निकलते सर्वेश और दिनेश।संवाद- फोटो : सांकेतिक

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें