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माननीयों ने फेरी नजर तो ग्रामीणों ने गोमती नदी पर बांधा लकड़ी का पुल

सार

केवल पैदल निकलने वालों का बोझ सहन करने की है क्षमता

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ग्रामीणों द्वारा बनाया गया लकड़ी का पुल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विस्तार
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बारिश में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने पर नहीं चलेगा पुल
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ग्रामीण बोले, सिर्फ गर्मी भर ही मिल सकेगी इस पुल से राहत

मैगलगंज (लखीमपुर खीरी)। क्षेत्र के महुआढाब गांव के लोगों ने गोमती नदी पर रस्सी के सहारे लकड़ी का पुल बांधकर सरकारी मशीनरी और माननीयों को आइना दिखाया है। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं से रपटा पुल बनवाने की मांग की, लेकिन हर बार नतीजा सिफर रहा, जिसके बाद उन्होंने खुद ही नदी पर लकड़ी का पुल बांध डाला। हालांकि यह पुल केवल पैदल निकलने वालों का ही बोझ सहन कर सकता है।
महुआढाब गांव के नदी पार करीब दो किलोमीटर की दूरी पर मौजूदा भाजपा उपाध्यक्ष और क्षेत्रीय सांसद रेखा वर्मा का गांव मकसूदपुर है। ऐसे में उनके सांसद बनने पर ग्रामीणों को उम्मीद थी कि शायद गोमती नदी पर रपटा पुल का निर्माण हो जाए, लेकिन लगातार दो बार लोकसभा का चुनाव जीतने के बावजूद कोई मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद ही पुल बनाने का बीड़ा उठाते हुए नदी पर लकड़ी का पुल बांध दिया।
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वर्तमान में ग्रामीण मकसूदपुर, नकटी, प्रकाश नगर व मोहम्मदपुर कला आने जाने के लिए इसी पुल का प्रयोग कर रहे हैं। मकसूदपुर में क्षेत्रीय बाजार लगने की वजह से भी ग्रामीण पैदल ही नदी पार करते हैं, क्योंकि लकड़ी के पुल पर बाइक आदि नहीं निकल सकती।
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ गर्मी भर इस पुल से राहत मिलेगी, बारिश के मौसम में गोमती का जलस्तर बढ़ने पर यह पुल काम नहीं आएगा। इस पुल से सिर्फ कुछ वक्त तक ही राहत मिलेगी।

नदी पार बैंक होने से इस पुल के जरिये नदी पार हो जाती है। हम आसानी से बगैर पानी में भीगे नदी पार चले जाते हैं काफी समय भी बचता है। सभी ग्राम वासियों को धन्यवाद।
- अनिल सिंह, महुआढाब

हम अपना गन्ना बैलगाड़ी में भरकर जब आपने गांव नकटी मकसूदपुर को बेचने जाते थे तो आठ-10 लोग बैलगाड़ी में धक्का लगा कर बैलगाड़ी को नदी पार कराते हैं। सरकार अगर पुल बनवा दे तो परेशानी नही होगी।
- परमेश्वरदीन, महुआढाब

पुराने समय में चार पांच बैलगाड़ी इकट्ठी हो जाती थीं तब एक साथ सभी लोग मिलकर बैलगाड़ियों को नदी पार कराते थे, तब जाकर कहीं रात को लौटकर आ पाते थे। पुल न होने से काफी परेशानियों का सामना किया है।

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- बिटोली देवी, महुआढाब

जीवन भर इस गोमती नदी को पार करके बैलगाड़ी से गन्ना ले जाते रहे हैं, काफी परेशानियों का सामना किया है। पुल बन जाता, तो बहुत अच्छी बात है। बच्चों ने जो पुल बनाया है, अच्छी पहल की है।
- बृजराज, महुआढाब

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