जिस अनाज को पीडीएस का बताकर पकड़वाया गया था वह एक किसान का निकला। ऐसा पूर्ति विभाग की जांच से स्पष्ट हुआ।
तहसीलदार सदर को मंगलवार की सुबह कोटे के राशन की कालाबाजारी के लिए ले जाने की शिकायत मिली। जिस पर उन्होंने कार्रवाई के लिए अधीनस्थों को मौके पर भेजा। शहर की ओर आ रही अनाज लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को तहसील कर्मियो ने उल्ल नदी पुल के करीब रोक लिया। सूचना एसडीएम और डीसीओ को भी दी गई। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर 120 बोरी गेहूं लदा था। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार लोगों से पूछताछ की गई। बताया गया कि गेहूं पीडीएस का नहीं है बल्कि घर में शादी होने के कारण पैसों की आवश्यकता के चलते बिक्री के लिए लेजाया जा रहा है। सत्यता परखने के लिए एसडीएम सदर अंकित अग्रवाल, डीसीओ राकेश तिवारी और तहसीलदार राजीव शुक्ला सिसौरा भी गांव पहुंचे। अधिकारियों के आदेश पर नायब तहसीलदार ओपी तिवारी और कुछ पुलिस कर्मी कस्बा स्थित आटा उद्योग केंद्र भी पहुंचे। लघु कारखाने पर पूछताछ की गई। अधिकारियों को कोटेदार मौके से गायब मिला। इस पर जांच पूरी होने तक कोटे को सील कर दिया गया। बाद में जांच के बाद शिकायत को झूठा पाते हुए क्लीन चिट देदी गई लेकिन संबधित वाहन को मय माल मंडी समिति के हवाले कर दिया गया। मंडी निरीक्षक की जांच पड़ताल में मंडी शुल्क की चोरी का मामला सामने आया। इस कारण करीब 32 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया।
डीएसओ डॉ.राकेश तिवारी का कहना है कि गेहूं पीडीएस का नहीं है। सरकारी प्रिंट के खाली बोरे खुली मार्केट में उपलब्ध हैं, जिनका किसान और व्यापारी प्रयोग करते हैं। कोटे पर लगे आरोपों की जांच जरूर की जा रही है।
मंडी निरीक्षक मदनलाल साहू के अनुसार पूर्ति विभाग से एनओसी मिलने के बाद मामला उनके विभाग को सौंपा गया है। मंडी शुल्क अदा न करने पर सिसौरा निवासी श्रवण कुमार पुत्र गुरु प्रसाद के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई है।