फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गेहूं खरीद में घालमेल : किसानों के पते में एक्सएक्सएक्स तो किसी में 123 दर्ज

Mon, 11 May 2026 11:34 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
पोर्टल पर पते वाले कॉलम में दर्ज अंक
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। सरकारी केंद्रों पर गेहूं खरीद चल रही है। सेंटरों पर किसानों की संख्या एकाध ही दिखाई दे रही है, लेकिन शाम होते-होते सैकड़ों किसानों की तौल हो जाती है। अधिकारियों की नजर में घालमेल न दिखाई दे इसको लेकर पोर्टल पर किसानों के पते छिपाए जा रहे हैं। पते वाले कॉलम में किसी में तीन एक्स तो किसी में 123 दर्ज किया जा रहा है।
विज्ञापन


इस बार जिले में गेहूं खरीद को लेकर 134 केंद्र बनाए गए हैं। इस बार 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को भुगतान किया जा रहा है जोकि पिछले साल से 160 रुपये अधिक है। शुरुआती कुछ दिनों तक केंद्रों पर किसानों की आमद नहीं हुई। पोर्टल पर खरीद का दायरा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों की नजर से किसानों को छिपाने के लिए केंद्र प्रभारियों ने नायाब तरीका निकाला है। जिन-जिन किसानों के फर्जी दस्तावेज लेकर खरीद दिखाई गई, पोर्टल पर उनके पतों में एक्सएक्सएक्स तो किसी में 123 के अलावा 32 आदि दर्ज किए गए। मंडी की आढ़तों पर खरीदे जाने वाले गेहूं को ही सरकारी केंद्रों पर खपाया जा रहा है। इसको लेकर एक बड़ा गैंग जिले में सक्रिय है।


घालमेल में सबसे ज्यादा एफसीआई और एफसीएस शामिल
बीते दो दिनों के बीच हुई खरीद के दौरान कुछ ऐसे किसान सामने आए जो इस पूरे फर्जीवाड़े की कलई खोल रहे हैं। एफसीआई ने 9 मई को अतीउर्रहमान से 30 क्विंटल की खरीद की। इनके पते में 95 लिखा हुआ है। वहीं इस्लामुद्दीन से आठ क्विंटल, शाहिद अली, मैसर जहां व शानू अहमद से साढ़े आठ-आठ क्विंटल की खरीद हुई। इनके पतों में 66 दर्ज है, जबकि गुरपेज से 110 क्विंटल व कुलवंत कौर से 19 क्विंटल इनमें पतों में 00 दर्ज है। इसी तरह एफसीएस ने अनुज कुमार से 129 क्विंटल व सियाराम राठौर से 191 क्विंटल की खरीद की। इनके पते में ओके दर्ज किया गया। इसके अलावा तरसेम सिंह से 15 क्विंटल, यशवंत सिंह से 50 क्विंटल व तरसेम कौर से 49 क्विंटल की खरीद हुई। इन तीनों में किसी के पते पर 12, 100 व 123 दर्ज है।
विज्ञापन

आढ़तों पर कम मूल्य में खरीदा...अब सरकारी भाव में बेच रहे
आढ़तियों ने एमएसपी से कम मूल्य पर किसानों की फसल खरीदी। इसके बाद अपने पास स्टॉक करते हुए ऐसे ग्रामीणों को चिह्नित किया जिनके दस्तावेज आसानी के साथ मिल सकें। दस्तावेज मिलते ही सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद दिखाते हुए उनके खातों में धनराशि भेज दी गई। इसके बाद पूरी रकम वापस करते हुए कुछ रुपये उन्हें दिए जाते हैं। मामूली रकम के लालच में किसान अपने दस्तावेज आसानी के साथ दे देते हैं।
विज्ञापन

-
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा किया जा रहा है तो गोपनीय तरीके से जांच कराकर संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।



- नमन पांडेय, डिप्टी आरएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें