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बारिश और आंधी से फसलों की तरह बिखर गईं किसानों की उम्मीदें

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लखीमपुर खीरी-गोला गोकर्णनाथ। चैत के महीने में अषाढ़ जैसी चार दिनों से हो रही बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों को झकझोर दिया है। अन्नदाता अब ऊपर वाले से यही प्रार्थना कर रहा है कि हे भगवान अब तो रहम करो।
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क्षेत्र के किसान बजाज चीनी मिल से भुगतान न मिल पाने के कारण पहले से ही परेशान हैं। उन्हें गेहूं की फसल अच्छी होने की आस बंधी थी कि फसल अच्छी हो जाने पर आर्थिक संकट से कुछ सहारा मिल जाएगा। लेकिन कुदरत की मार ऐसी कि चार दिनों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की बची खुची उम्मीद भी तोड़ दी है। ओला गिरने से जहां खेतों में तैयार खड़े गेहूं की बालियां टूट गई हैं वहीं सरसों खेत में ही बिखर रही है।
ममरी। शनिवार शाम भीषण ओलावृष्टि होने के बाद बारिश का क्रम रविवार को जारी रहा, जिससे किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा। ममरी के पारसनाथ का कहना है कि उनके खेत में खड़ी लाही की फसल, सुंदरपुर के रामकुमार वर्मा के खेत में खड़े गेहूं, खोखाय के खुशीराम के खेत में खड़ी लाही ओलावृष्टि से चौपट हो गई है। क्षेत्र में ओलावृष्टि, बारिश का क्रम रविवार को भी जारी रहा।
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अमीरनगर। रविवार की रात से शुरू हुई बारिश को देख कर एक बार फिर किसान हलकान हैं। बताते चलें कि शुक्रवार को आंधी ,बारिश, ओलावृष्टि से इलाके में गेहूं की अगेती फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। साथ ही गन्ने की कटाई करके बोया गया गेहूं भी इस बार आंधी, बारिश में गिर गया।
गुलरिया। तहसील गोला के जहानपुर, लखहा, अलीगंज, जोधपुर, दाउदपुर, गिरधरपुर, कल्लूपुरवा, मतयीपुरवा, रुद्रापुर, रामनगर, लखहा भूड आदि गावों में शनिवार की शाम को तेज गरज, चमक के साथ ओलावृष्टि होने से खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। लाही की फसल बर्बाद हो गई है। गेहूं, मसूर, मटर की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। ज्यादा बारिश हो जाने से खेतों में पानी भर गया है, जिससे गन्ने की बुआई भी अब काफी लेट हो रही है।
पीड़ित किसानों ने फसल मुआवजा की आवाज बुलंद की
बांकेगंज नगर से सटे पूरनपुर गांव निवासी किसान संदीप सिंह, गुरदीप सिंह, बल्देव सिंह, रंजीत सिंह, गुरदेव सिंह, विचित्र सिंह आदि का कहना है शनिवार दोपहर बाद तेज हवाओं के साथ बेमौसम हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि से खेतों में लहलहाती फसलें चौपट हो गईं। बारिश के साथ हुई भारी ओलावृष्टि से उनकी फसलों में एक फुट से अधिक ओले इकट्ठा हो गए। बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, मसूर, सरसों, चना और आलू फसलों को पहुंचा है। जिससे फसल उत्पादन में 60 फीसदी से अधिक नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि के बाद तबाह हुई फसलों से उत्पादन में कमी होने पर उनकी आर्थिक स्थित डंवाडोल हो गई है। बसंतकालीन गन्ना बुआई भी पिछड़ गई है। खेतों में बारिश का पानी भरने से खेती-किसानी चौपट हो रही है। जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इससे परेशान किसानों ने शासन-प्रशासन के जिम्मेदारों से बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
कुदरत का किसानों पर कहर अब तो सिर्फ सरकार से है उम्मीद
मोहम्मदी में रविवार को भी हुई बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि खेतों में खड़ी फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। बारिश व हवाओं ने गेहूं सरसों अरहर एवं सब्जी की टमाटर, गोभी, भिंडी, खीरा, कद्दू जैसी फसलों को बर्बाद कर दिया है। आम के पेड़ों में लगे बौर भी ओलावृष्टि के कारण नीचे गिर जाने से भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
जंगबहादुरगंज। क्षेत्र के ग्राम किरियारा, मछैछा, मुड़िया अहवन, नगरा ,मजरा, मोहम्मदपुरताजपुर, सोहक, सिसौरा नासिर में रविवार सुबह लगभग आठ बजे बारिश और ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि लगभग बीस मिनट तक हुई। इसके अलावा पसगवां, जंगबहादुरगंज , नरदी सहित कई गांवों में लगभग आधा घंटा वर्षा हुई। किरियारा के पूर्व प्रधान कदीर खां, मछैछा के प्रधान प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार , सिसौरा नासिर के प्रधान बब्बन खां आदि का कहना है कि ऐसी बेमौसम बारिश उन्होंने अपने जीवन में नही देखी। किसानों का कहना है कि फसलों को बारिश और ओलावृष्टि से 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत क्षति हुई। जिससे वे चिंतित हैं।
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