लखीमपुर में गलन के बीच बच्चों के साथ बाजार जातीं एक महिला। संवाद
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लखीमपुर खीरी। गुरुवार को सुबह कोहरा गिरने के साथ ही शीतलहर भी चलने लगी। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के बाद बर्फीली हवाओं से ठिठुरन बढ़ गई है। नए साल पर लोगों का सामना कड़ाके की ठंड के साथ ही बारिश से होगा, जिसका मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है। नए साल पर कड़ाके की ठंडक का सिलसिला मकर संक्रांति तक चालू रह सकता है।
तराई में करीब एक सप्ताह से लोगों को शीतलहर और गलन से राहत मिली हुई थी, लेकिन गुरुवार को मौसम में बदलाव आने के साथ ही शीतलहर का प्रकोप शुरू हो गया। इससे लोगों को कड़ाके की ठंड और गलन से दिक्कत का सामना करना पड़ा। शीतलहर से बचने के लिए टोपी-मफलर निकालनी पड़ी। शाम होते ही गलन बढ़ गई। गुरुवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेलियस रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि पहाड़ों पर बर्फ पिघल रही है, जिससे मैदानी व तराई क्षेत्रों में बर्फीली हवाएं पहुंचने लगी हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को आसमान साफ रहेगा, लेकिन शीतलहर चलेगी। रविवार को बादल छाएंगे, जिससे बारिश होने की पूरी संभावना जताई है। अगले दिन सोमवार को भी बादल छाए रहेेंगे, जिससे इस दिन भी बारिश के साथ आंधी आने की संभावना जताई गई है।
लाइट जलाकर निकले वाहन
पलिया-मझगईं। गुरुवार को सुबह भीषण कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। घने कोहरे में वाहनों की रफ्तार जहां धीमी हुई वहीं दिन में लोग लाइट जलाकर निकलने को विवश हुए। कोहरे के साथ चली पछुआ हवा से भीषण सर्दी का प्रकोप रहा। हाड़ कंपाने वाली ठंड के चलते लोग घरों में दुबके रहे। दोपहर में कुछ देर के लिए धूप के दीदार तो हुए लेकिन वह भी चल रही हवाओं के आगे बेबस साबित हुई। ठंड से सबसे अधिक दिहाड़ी मजदूरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। संवाद
गेहूं की फसल के लिए मौसम मुफीद
लखीमपुर खीरी। कोहरे और शीतलहर के प्रकोप से लोगों की परेशानियां बढ़ी है, लेकिन किसानों में खुशी है। गेहूं की बुआई के 20 से 25 दिन बाद हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इसलिए बारिश होने पर गेहूं की फसल की सिंचाई मुफ्त में हो जाएगी। कृषि वैज्ञानिक डॉ पीके बिसेन ने बताया कि पिछले 10 दिनों से मौसम साफ रहने के साथ ही धूप निकल रही थी, जिससे किसान चिंतित होने लगे थे। अब कोहरा गिरने के साथ ही ठंडक बढ़ गई है, जो गेहूं की बढ़िया पैदावार के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल में यदि सकरी व चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दें रहे हैं, तो सल्फोसल्फुरान 75 प्रतिशत डब्ल्यू पी 33 ग्राम/हेक्टेयर या मैट्रीब्यूजिन 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी 250 ग्राम/हेक्टेयर की दर से 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। संवाद