जिला पंचायत चुनाव की तर्ज पर ही ब्लाक प्रमुख चुनाव में भी विपक्ष मजबूर नजर आया। भाजपा, बसपा और कांग्रेस की ओर से कहीं भी कोई प्रत्याशी नहीं उतारे जा सके। हां, पसगवां सीट पर भाजपा सांसद रेखा वर्मा ने मां उर्मिला कटियार को प्रमुख बनाने के लिए प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी, जिससे यहां सपा का विरोध हो गया। वहीं मोहम्मदी से बागी प्रत्याशी जयकरन वाजपेयी, पलिया में देवेन्द्र गट्टू और निघासन में पूनम देवी ने बगावत कर दी, जबकि ईसानगर में एक अन्य प्रत्याशी ने नामांकन करा दिया। इस तरह पांच सीटों पर ही ब्लाक प्रमुख के लिए घमासान होने की उम्मीद है। उधर विपक्ष के जिलाध्यक्षों का आरोप है कि सत्ता पक्ष के दबाव में प्रशासन ने विपक्ष को चुनाव लड़ने से रोकने का कुचक्र रचा। इसलिए नामांकन पत्र नहीं दिया गया। अधिकतर जगहों पर प्रत्याशियों को उन पर मुकदमा दर्ज कराने सहित तमाम हथकंडे अपनाकर चुनाव लड़ने से रोका गया। कुल मिलाकर विरोधियों की मजबूरी और चुप्पी का नतीजा रहा कि सपा ने बिना चुनाव लड़े ही 10 क्षेत्र पंचायत प्रमुख की सीटों पर कब्जा तय कर लिया।
...और कुछ इस तरह सत्ता पर हमलावर हुआ विपक्ष
भाजपा जिलाध्यक्ष शरद वाजपेयी ने कहा कि ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव में प्रशासनिक अमले में पूरी मनमानी की है। सपा ने प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए ब्लाकों पर पर्चे सिर्फ सपा प्रत्याशियों को ही दिए। प्रशासन ने पसगवां सहित कई ब्लाकों का एआरओ बदल दिया, ताकि मतदाताओं पर सत्ता पक्ष के प्रत्याशी को जिताने के लिए दबाव बनाया जा सके।
सपा ने उत्पीड़न करने में नहीं छोड़ी कसर
बसपा जिलाध्यक्ष अजय चौधरी ने कहा कि ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव में पार्टी की ओर से चुनाव लडने के निर्देश नहीं थे, इसलिए प्रत्याशी नहीं उतारा गया। उन्होंने कहा कि सपा ने लोगों का उत्पीड़न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जो चुनाव की तैयारी करता है तो उस पर मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जाती है।
कांग्रेस ने सदर विधायक की हार बताया
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह का कहना है कि पार्टी की ओर से ब्लाक प्रमुख पद का चुनाव लड़ने का निर्देश नहीं था। हां सदर ब्लाक में सपा की रूबी वर्मा को कांग्रेस के समर्थन के कारण टिकट मिला, जबकि पहले दूसरे को टिकट दिया गया था। इससे सपा के दिग्गजों को भी मुंह की खानी पड़ी।
सपा की लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा
सपा जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल का कहना है कि 10 सीटों पर निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुने जाने के पीछे सपा की लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विपक्ष के जिलाध्यक्षों के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सपा ने निष्पक्ष चुनाव कराया है। यदि कोई दबाव होता तो सभी 15 सीटों पर सपा का कब्जा होता। प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप बेबुनियाद है।