बेटे और बहू के व्यवहार से दुखी पिता ने छोड़ा घर
जिस पिता ने अपने बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया। उसे जब सहारे की जरूरत हुई तो बेटे ने उसे वृद्धाश्रम छोड़ दिया। ऐसी ही कहानी है मोहम्मदी के बाबूराम की। करीब दो साल से बाबूराम वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पहली पत्नी के देहांत हो जाने के बाद उन्होंने दूसरी शादी कर ली। बेटे और बहू के गलत व्यवहार से परेशान होकर दोनों वृद्धाश्रम को ही अपना घर समझ, यहां के लोगों को परिवार मानकर बची हुई जिंदगी गुजार रहे हैं। बाबूराम के एक बेटा और एक बेटी है। बेटी के लाख कहने पर भी बाबूराम उसके घर नहीं गए। बेटों ने आज तक उनका हाल भी जानने का प्रयास नहीं किया।
सारी प्रॉपर्टी बच्चों को दी, बदले में मिली उपेक्षा
शहर के मोहल्ला शिव कॉलोनी निवासी गंगा सिंह के पास लाखों रुपये की खेती और मकान था। पत्नी के गुजर जाने के बाद गंगाराम ने सारी प्रॉपर्टी बेचकर चारों बेटों को रुपये दे दिए। गंगाराम का कहना था कि बुढ़ापे में यही बच्चे उनका सहारा बनेंगे, लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया।
उन्होंने कहा कि करीब पांच लाख रुपये उन्होंने बुढ़ापे के लिए बचाए थे, एक बेटे ने जालसाजी से वो पैसे भी निकाल लिए। दो महीनों से वह यहीं वृद्धाश्रम में रहकर जिंदगी गुजार रहे हैं। कहा कि बेटों के पास जाने पर घर में लड़ाई-झगड़ा और बेटों के व्यवहार में काफी बदलाव हो जाता है, इसलिए यहीं रहना ठीक है।