बांकेगंज की नहर में छोड़ा गया पानी। स्रोत : संवाद
बांकेगंज। सिल्ट सफाई के लिए करीब 66 दिन पहले आठ अक्तूबर को बंद की गई खीरी और सीतापुर ब्रांच नहरों में शुक्रवार रात 10 बजे पानी आ गया।
नहरों से जिले के अन्नदाताओं के खेतों की सिंचाई होती है, लेकिन सिंचाई का दायरा काफी अधिक होने से क्षेत्र समेत फरधान, ममरी,अहमदनगर, मैलानी में नहर विभाग की उदासीनता से किसानों को दिक्कतें उठानी पड़ीं। गेंहू बोआई का समय निकलते देख लोगों ने महंगा डीजल खरीदकर खेतों का पलेवा किया। इस कारण उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ी। किसानों का कहना है कि अब जब गेंहू, गन्ना और आलू फसल की बोआई का काम करीब-करीब खत्म हो गया है, तब नहरों में पानी छोड़ा गया है।
सिंचाई विभाग की ओर से जारी रोस्टर के बाद 13 दिसंबर से नहरों में छोड़ा गया पानी 15 दिन तक मिलेगा। इसके बाद एक सप्ताह तक फिर बंद रहने के बाद दोबारा छोड़ा जाएगा।
पानी आते ही किसानों में मची आपाधापी
ममरी। क्षेत्र की खीरी और सीतापुर ब्रांच तथा उनकी सहायक नहरों में शुक्रवार रात पानी आते ही दो महीने से सिंचाई के लिए परेशान किसानों में आपाधापी मच गई। नहर विभाग के अवर अभियंता अभिषेक सिंह का कहना है कि नहरें कम से कम दो सप्ताह चलाई जाएंगी। किसी को झगड़ा करने की जरूरत नहीं है। सभी किसान दो सप्ताह की अवधि में फसलों की सिंचाई बारी-बारी से कर सकते हैं। संवाद