नगर स्थित बजाज ग्रुप की चीनी मिल का रसायनयुक्त गंदा पानी सूखी पड़ी सरायन नदी में जा रहा है। इसके बाद यह पानी गोमती और गंगा तक पहुंच रहा है। इससे जलीय जंतुओं के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट और सीजेएम न्यायालय ने दूषित उत्प्रवाह पर रोक लगा रखी है, किंतु आदेश के बावजूद गंदा पानी नदी में उड़ेला जा रहा है।
अतीत में लाइफ लाइन कही जाने वाली ग्राम अहमदनगर से निकली सरायन नदी के जल स्रोत सूख चुके हैं। इस नदी में अब सिर्फ चीनी मिल का प्रदूषित पानी ही बह रहा है। सरायन नदी सीतापुर से आगे बढ़कर गोमती नदी में और गोमती नदी जौनपुर के पास गंगा में विलीन होती है। नदी में औद्योगिक कचड़ा युक्त जल प्रवाहित होने के कारण सरायन का पानी पीने तो क्या पशुओं के स्नान करने के लायक भी नहीं रहा है। प्रदूषित जल के नदी में प्रवाहित होने पर पहले तो सीजेएम न्यायालय लखीमपुर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी किंतु इस आदेश पर अमल नहीं हो रहा है।
कई दशक पहले लगी थी रोक
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक याचिका पर सुनवाई कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खीरी की अदालत ने तीन दशक पूर्व बोर्ड द्वारा निर्धारित मापदंडो के आधार पर प्रदूषित जल सरायन नदी में प्रवाहित करने पर रोक लगा दी थी, तब मिल ने जिला जज की अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे खारिज कर न्यायालय ने निचली अदालत का आदेश जारी रखा था। दो दशक पूर्व सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. महेशचंद्र मेहता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चीनी मिल गोला और कानपुर की कई अन्य चमड़ा मिलों और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर सुनवाई की थी और इन मिलों के प्रदूषित उत्प्रवाह को नदियों में डालने पर रोक लगा दी थी। न्यायालय के आदेश का असर तो कुछ दिन रहा, किंतु इसके बाद फिर प्रदूषित पानी नदी में डाला जाने लगा।
वर्ष 1990 में लगा था जल प्रदूषण संयंत्र
वर्ष 1989 में छोटी काशी विकास संघर्ष समिति ने मिल के प्रदूषण के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान चलाया था और 5000 हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन प्रधानमंत्री समेत उच्चाधिकारियों को भेजा था, जिस पर भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने प्रदूषण की जांच करा मिल को दोषी पाया था। इस पर 1990 में मिल ने फ्रांस की एक कंपनी से कांटेक्ट कर जल प्रदूषण संयंत्र लगवा लिया, किंतु संयंत्र पर कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं रहती। इस कारण संयंत्र नहीं चल पा रहा है।
भूगर्भ जल हो गया है प्रदूषित
जल प्रदूषण संयंत्र के समीप चीनी मिल ने कई गहरे तालाब बना रखे हैं, जिनमें प्रदूषित जल भरा जाता है इस कारण यहां का भूगर्भ जल प्रदूषित हो गया है। चीनी मिल के समीप बसे ग्राम भवानीगंज में पदम पुराण में वर्णित कोणार्क कुंडा में पहले लोग स्नान करते थे, किंतु चीनी मिल द्वारा प्रदूषित प्रवाह इस कुंड में छोड़ दिए जाने के कारण इसका जल प्रदूषित हो गया है। गांव के रंजीत सिंह, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, बलभद्र सिंह ने बताया के गांव में काफी घरों में हैंडपंप लगे हैं किंतु कुंड के जल के प्रदूषित होने के कारण घरों में लगे हैंडपंपों से पीला पानी निकलता है उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व पुलिया बंद कर दिए जाने से प्रदूषित जल तो कुंड में नहीं आता किंतु वर्षा काल में प्रदूषित जल कुंड में पहुंचता है। गांव के लोग प्रदूषित जल पीकर बीमार हो रहे हैं।
गन्ने के लिए वरदान है गंदा पानी
औद्योगिक कचड़ायुक्त पानी गन्ने की खेती के लिए वरदान है चीनी मिल ने अपनी पाइप लाइनों और एक नाले के द्वारा ग्राम कोरैया, कोंधवा सहित लगभग एक दर्जन गांवों में प्रदूषित जल की आपूर्ति वर्षों पूर्व शुरू कर दी थी। पानी को गन्ने के खेतों में किसान लगाकर लाभांवित हो रहे हैं। उनकी गन्ने की फसलें दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही हैं। चीनी मिल अब अपने टैंकरों के द्वारा दूर दूर के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचा रहा है। किसान बताते हैं कि इस पानी से गन्ने के पौधे हरे रहते हैं, उनमें कीड़े और रोग नहीं लगते तथा गन्ने की फसल तेजी के साथ बढ़ जाती है।
चीनी मिल का प्रदूषित पानी सरायन नदी में नहीं जाता है। जो पानी जा रहा है, वह मिल कॉलोनी का जाता है। जल प्रदूषण संयंत्र से साफ कर किसानों के खेतों तक पानी भेजा जा रहा है। इससे किसानों की उपज बढ़ रही है। - ओमपाल सिंह, यूनिट हेड