लखीमपुर खीरी। पलिया, निघासन, फूलबेहड़, बिजुआ और धौरहरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। घरों में पानी भरा है। छतों और सड़कों पर डेरा जमाए बाढ़ पीड़ितों को भोजन, पानी, प्रकाश और अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पलिया-भीरा मार्ग पर आवागमन अब तक सुचारू नहीं हो सका है। हालांकि बाइक चालक पूरे दिन जोखिम के बीच से गुजरते रहे। निघासन के गोतेबाज पुरवा के बाढ़ पीड़ित छतों पर और बस्ती पुरवा के ग्रामीण सड़क किनारे पड़े हैं। गांव ग्रंट 12 में शारदा नदी ने कटान तेजी से शुरू कर दिया है।
निघासन। निघासन तहसील के बाढ़ प्रभवित गांवों के ग्रामीण एक तरफ कुदरत का कहर दूसरी तरफ प्रशासन की बेरुखी का दंश झेल रहे हैं। गोतेबाज पुरवा के लोग छतों पर और बस्तीपुरवा गांव के बाढ़ पीड़ित सड़क किनारे पड़े हैं। इन पीड़ितों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।
शारदा नदी की बाढ़ का पानी गोतेबाज पुरवा में पांच दिन से भरा है। रास्ते पर आने-जाने के लिए नाव के अलावा दूसरा कोई साधन नहीं है। गांव के लोग छतों पर अपना आशियाना बनाए हैं। बाढ़ पीड़ित फूला, कमरूननिशा, जहाना, उमर, इम्तियाज, सलमान, छंगा और निहाल आदि ने जब अपना दर्द बयां किया तो आंसू छलक पड़े।
बताया कि खाने की सारी वस्तुएं समाप्त हो गईं हैं। एक-दूसरे से सामान मांग कर किसी तरह गुजारा किया जा रहा है। अचानक पानी घरों में भरने से अनाज भी भीग चुका है। पांच दिन से कोई भी झांकने नहीं पहुंचा। बाढ़ पीड़ितों में प्रधान से लेकर प्रशासन तक गुस्सा भरा हुआ है।
बरोठा के मजरा बस्तीपुरवा और नगर पंचायत के मोहल्ला नानक नगर में भी हालात खराब हैं। बरोठा जाने वाले रास्ते पर बाढ़ पीड़ित तीन दिन से पड़े हैं। मनोज ने बताया कि उनका छप्पर वाला पूरा घर पानी में बह चुका है। पिछले महीने बाढ़ आई थी, तब भी कुछ नहीं मिला था। इस बार फिर तीन दिन से सड़क पर हैं। लंच पैकेट मिलना तो दूर कोई हाल जानने तक नहीं आया है। खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ियां तक नहीं मिल रहीं हैं। गैस सिलेंडर तो है, लेकिन गैस भराने के लिए पैसा नहीं है। किसी तरह से एक समय का खाना नसीब हो जाता है।
अदलाबाद-निघासन मार्ग पर एक किलोमीटर तक पानी ही पानी
निघासन से अदलाबाद जाने वाले मार्ग पर छीटन पुरवा से कुर्मिन पुरवा तक सड़क पर दो से तीन फुट पानी चल रहा है। सबसे अधिक पानी कटी बगिया के पास है। लोग अपने वाहन जान जोखिम में डालकर निकाल रहे हैं।
एसडीएम का दावा 19 गांव ही प्रभावित
एसडीएम राजीव निगम ने बताया कि शारदा, मुहाना और सुहेली नदी से तहसील क्षेत्र के मात्र 19 गांव जलमग्न हैं, जबकि बल्लीपुर से संकरी गौढी तक गांव के अंदर पानी ही पानी है। पिछले वर्ष भी 14 गांव बाढ़ से प्रभावित दिखाकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन 80 गांव प्रभावित थे। शायद यही कारण है कि प्रशासन से मिलने वाली सहायता बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल पाती है।
तहसील के 19 गांव प्रभावित हैं। सभी जगह लंच पैकेट भेजे जा रहे हैं। - राजीव निगम, एसडीएम
ग्रांट 12 में शिव मंदिर का कटान कर रही शारदा नदी
- खेत और रास्ते जलमग्न, नाव से हो रहा आवागमन
संवाद न्यूज एजेंसी
महेवागंज। चार दिन बाद शारदा नदी का उफान तो कुछ थमा है, बावजूद इसके बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं हुईं हैं। तटबंध के अंदर के बसे मंगलीपुरवा, खगईपूरवा, चकई, गोपालपुरवा, बड़ागांव, बसहा, बेचनपुर, बेडहा सुतिया, गूम, जदीदपुरवा, बहालीपुरवा सहित 50 से अधिक गांव टापू बने हैं। खेत, खलिहान और रास्ते पानी में डूबे हुए हैं। नाव से आवागमन हो रहा है। प्रशासन की मदद लंच पैकेट तक सीमित है।
निघासन तहसील के ग्रांट-12 गांव में नदी ने फिर कटान शुरू कर दिया है। मंगलवार को नदी गांव के उत्तर बड़े शिव मंदिर परिसर तक पहुंच गई। चहारदीवारी और कमरे का कटान शुरू कर दिया है। दीवार और सीढ़ियों सहित अधिकांश हिस्सा नदी में समा चुका है। ग्रामीणों में अफरातफरी और प्रशासन के प्रति गुस्सा है।
गांव के करीब 60 से ज्यादा घर कटान की जद में है। कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने कटान को रोकने के निजी प्रयास किए थे। मिट्टी रेत भर कर सैकड़ों बोरियां किनारे पर डालीं। गांव के इंदु शुक्ला, रत्नेश और अखिलेश शुक्ला ने बताया कि चार दिन पहले नदी के उफान से मेहनत पर पानी फिर गया था। आर्थिक नुकसान हुआ सो अलग। ग्रामीणों का कहना है कि डूब क्षेत्र का पाठ पढ़ाकर प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
गांवों के संपर्क मार्गों पर भरा बाढ़ का पानी, खेत-खलिहान जलमग्न
- मझगईं में बाढ़ के पानी से गिरा घर, बाल-बाल बचे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
मझगईं। पलिया-निघासन मार्ग से भले ही पानी निकल गया है, लेकिन गांवों में बाढ़ की स्थिति जस की तस है। घरों में पानी भरा है। नौगवां कस्बा से खालेपुरवा व बेला टापर जाने वाले मार्ग, तिकोना पुल बस स्टाप से बल्लीपुर, निघासन मार्ग से वनघुसरी व कोठिया जाने वाले रास्तों पर बाढ़ का पानी अब भी चल रहा है। इससे आवागमन बंद है।
खेतों में बाढ़ का पानी तीन दिन से भरा होने से धान, गन्ना व केले की फसल बरबाद हो गई है। किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। उधर, मझगईं में पलिया-निघासन मार्ग पर ईदगाह के आगे सड़क किनारे छप्परनुमा घर बनाकर रह रहे रोहित कुमार का घर बाढ़ के पानी में गिर गया। गनीमत रही कि घर ढहने के समय सभी लोग घर के बाहर बैठे हुए थे। पीड़ित रोहित ने बताया कि घर गिरने से काफी नुकसान हुआ है।
कमिश्नर ने लुधौनी ग्रामसभा का किया निरीक्षण
खमरिया। लखनऊ मंडल की कमिश्नर रौशन जैकब ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित ग्रामसभा लुधौनी के गांवों का दौरा कर बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने ग्रामीणों को बाढ़ राहत किट का वितरण किया। कमिश्नर ने संबंधित लेखपाल से बाढ़ प्रभावित इलाकों का सर्वे कर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए। गांव में करीब एक फुट पानी भरा है। संवाद
शरदानदी में समाता शिव मंदिर प्रांगण। संवाद
शरदानदी में समाता शिव मंदिर प्रांगण। संवाद
शरदानदी में समाता शिव मंदिर प्रांगण। संवाद
शरदानदी में समाता शिव मंदिर प्रांगण। संवाद