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घर में नहीं था अनाज का दाना, लगा ली फांसी

Thu, 21 Apr 2016 10:26 PM IST
ब्यूरो निघासन (लखीमपुर खीरी)।
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परिवार का हाल - फोटो : अमर उजाला
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पहले पत्नी ने पीया कीटनाशक, रात में पति ने फंदे पर लटककर दी जान
निघासन के गांव तारानगर का हृदय विदारक मामला
गरीबी की मार झेल रहा है थारू जनजाति का परिवार
बेटी की शादी में आए मेहमान रह गए भूखे तो टूट गए

 खाद्य सुरक्षा के नियम कानून भले ही बन गए हों लेकिन गरीबों को दाना पानी नसीब नहीं हो रहा है। घर में आए मेहमान को खाने न खिला पाने की कसक में थारू जनजाति के अधेड़ टीकाराम ने रात में फांसी पर लटककर जान दे दी। टीकाराम इसलिए भी टूट गया था कि उससे पहले उसकी पत्नी पार्वती ने मेहमान को खाना तक न खिला पाने की विवशता जताते हुए कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश की थी। पार्वती अस्पताल में थी औ टीकाराम ने उसी दुकान के बाहर के टीनशेड में फांसी लगा ली, वह जिसकी चौकीदारी करता था। चार दिन पहले ही टीकाराम ने अपनी चौथी बेटी की शादी की थी और घर पर मेहमानों की चहलपहल थी लेकिन अनाज का एक भी दाना नहीं था। 
गांव तारानगर निवासी 50 वर्षीय टीकाराम और उनकी पत्नी पार्वती 20 सालों से यहां रहते हैं। उनके तीन बेटे और पांच बेटियां हैं। टीकाराम एक बेटे और तीन बेटियों की शादी कर चुके थे। चौथी बेटी पूजा की शादी चार दिन पहले बहराइच जिले के बरखरिया गांव में हुई। गरीबी से परेशान दंपति ने कुछ लोगों से कर्जा लेकर रविवार को पूजा की शादी की थी। मेहमानों का आना जाना लगा था। टीकाराम की पत्नी पार्वती ने बताया कि बुधवार की शाम मेहमानों को खिलाने के लिए अन्न का एक दाना नहीं बचा था। पड़ोसियों को पता चला तो उन लोगों ने खाने के लिए कुछ चावल और आलू दिए। फिर भी परिवार के दो सदस्य और एक मेहमान खाना खाने से रह गए। कर्ज और गरीबी की यह इंतेहा देखकर दोनों टूट गए। रात में टीकाराम चौकीदारी करने चला गया तो पार्वती ने कीटनाशक पी लिया। परिवारवालों ने पार्वती को सीएचसी में भर्ती कराया। टीकाराम घर आया फिर चौकीदारी करने चला गया। सुबह उसका शव दुकान के बाहर के टीनशेड के एंगल से नाइलोन की रस्सी से लटकता मिला। सुबह उसका शव देखकर गांव में सनसनी फैल गई। परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर टीकाराम का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, पिता की मौत से नवविवाहिता पुत्री पूजा बेहोश हो गई। उसे भी सीएचसी में भर्ती कराया गया। मां-बेटी का इलाज कर रहे डॉ लालजी पासी ने बताया कि दोनों की हालत में सुधार है।
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बच्चे भी करते थे मजदूरी लेकिन गरीबी से लड़ नहीं पाए 
पट्टे पर खेत मिला लेकिन मौसम धोखा देता रहा, चढ़ता रहा कर्ज
गांव तारानगर में अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए थारू टीकाराम, उसकी पत्नी पार्वती के अलावा बच्चे भी मजदूरी करते थे लेकिन गरीबी से जीत नहीं पाए। बड़ी परिवार और बेटियों की शादी के कर्ज लेने के कारण टीकाराम आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। पुराना कर्ज सिर पर और घर में अन्न का एक भी दाना नहीं, ऐसे में दंपति ने आत्मघाती कदम उठा लिया। पार्वती को सही समय पर अस्पताल पर ले जाने के कारण बचा लिया गया।
अनुसूचित जनजाति (थारू) के लोगों का जीवन स्तर उठाने के लिए करोड़ों की योजनाएं बनाने वाला शासन और प्रशासन भले ही तमाम दावे करता हो, लेकिन टीकाराम की गरीबी इन दावों की पोल खोल रही है। टीकाराम के परिवार में उसकी पत्नी पार्वती, बेटे धर्मेंद्र, मिट्ठू, संतोष, बेटियां मैकिन, शारदा, सविता, पूजा और देव कुमारी है। उनकी गरीबी देखते हुए पांच साल पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान ने ढाई बीघा जमीन का पट्टा बना दिया था। लेकिन पिछले तीन सालों से मौसम की मार ने खेती को सहारा भी छीन लिया। इस साल भी सिंचाई के अभाव में टीकाराम के खेत में काफी फसल सूख गई है। टीकाराम रात में बिनौरा ग्राम पंचायत के प्रधानपति नुरुल हसन की दुकान की रखवाली और दिन में मजदूरी करता था। सात सालों में टीकाराम ने कर्ज और मदद से बेटे धर्मेंद्र, बेटी मैकिन, शारदा, सविता का ब्याह कर दिया था। बेटों धर्मेंद्र, मिट्ठू ने मजदूरी करके किसी तरह से कर्ज चुका दिया था। पूजा की शादी के लिए बिनौरा के प्रधानपति नुरूल हसन, पड़ोसी अनिल कुमार समेत कई लोगों ने उसकी मदद की थी। टीकराम ने भी विवाह का सामान उधार लिया था। इस कर्ज से सभी परेशान थे। 

गांव नहीं पहुंचा कोई राजस्व अधिकारी
तत्कालीन डीएम किंजल सिंह ने थारू उत्थान के लिए कई प्रयास किए तो अधिकारी थारू जनजाति को सिर आंखों पर रखते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आर्थिक तंगी के चलते खुदकुशी करने वाले थारू टीकाराम के घर राजस्व विभाग का एक भी कर्मचारी अधिकारी हालचाल लेने तक नहीं पहुंचा। 

कोटेदार ने केवल 10 किलो गेहूं दिया 
मृतक टीकराम की बहू सरिता ने बताया कि अंत्योदय कार्ड होने के बावजूद कोटेदार ने उसे 35 किलो राशन के बजाय मात्र 10 किलो गेहूं ही दिया था। आरोप है कि कोटेदार ने कार्ड पर पूरा राशन चढ़ा दिया था। शादी का वास्ता देने के बाद भी कोटेदार ने चीनी और राशन नहीं दिया।
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मदद को बढ़े हाथ
सीएचसी में भर्ती टीकाराम की पत्नी पार्वती और उसकी नवविवाहिता पुत्री पूजा को देखने के लिए कई लोग अस्पताल पहुंचे। उसकी आर्थिक स्थित देखकर लुधौरी रेंज के रेंजर रणवीर मिश्रा, सीएचसी प्रभारी लालजी पासी, रकेहटी की आशा बहू मीनू चतुर्वेदी, अरुणिमा, एलपी यादव के अलावा मूडा प्रधान पति रमेश, नुरूल हसन आदि ने आर्थिक मदद की। 


मामले की सूचना मिलने पर लेखपाल को जांच के लिए भेजा गया है। आख्या मिलने के बाद पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाया जाएगा।
- जगदीश सिंह, तहसीलदार 
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