गंदगी और जलभराव होने के कारण तेजी से फैल रहे संक्रामक रोग
आंगनबाड़ी वर्कर से लेकर कई ग्रामीण तेज बुखार की चपेट में
ग्रामीण बोले, मच्छरों की भरमार, नहीं हो रहा एंटी लार्वा का छिड़काव
मैगलगंज। थाना क्षेत्र और सीएचसी मितौली के अंतर्गत गांव ककरहा में बुखार से ग्रामीण कराह रहे हैं। आंगनबाड़ी वर्कर से लेकर तमाम ग्रामीण तेज बुखार की आंच में तप रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि बुखार से एक और किशोर की मौत तक हो गई है, जबकि अन्य पीड़ितों का इलाज आसपास के शहरों में चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मच्छरों की भरमार है। इनकी रोकथाम के लिए न तो एंटीलार्वा का छिड़काव हुआ है और न ही फॉगिंग ही। बुखार का प्रकोप होने के बावजूद गांव में जगह जगह पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
गांव ककरहा निवासी श्याम बिहारी ने बताया कि पुत्र राजीत को बुखार आया, जिसके दूसरे दिन उसकी मौत हो गई, जबकि पुत्र सानुज का इलाज चल रहा है। आंगनबाड़ी वर्कर सुनीता पत्नी सर्वेश कुमार भी बुखार की चपेट में हैं। हालात गंभीर होने के कारण उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया।
गांव निवासी तारावती, मारेध्वज, श्यामजी गुप्ता, प्रेमचंद मौर्य, श्यामवती, लक्ष्मी, रणवीर, राहुल, यूनुस, गीता, राजवी सहित अन्य तमाम ग्रामीण बुखार की चपेट में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग हर घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है। ग्रामीण बताते हैं कि बुखार जानलेवा तक बन गया है। फिर भी न तो गांव की सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही एंटीलार्वा का छिड़काव एवं फॉगिंग कराई जा रही है। दिन हो या फिर रात में मच्छरों ने जीना दुश्वार कर दिया।
गांव में गंदगी का अंबार लोगों का कर रहा जीना दुश्वार
गांव में सैकड़ों की संख्या में कूड़े के ढेर लगे हैं। वहीं जगह-जगह पर गंदा पाना इकट्ठा है। गांव की नालियां भी गंदगी से बजबजा रही हैं, जिनमें मच्छर पनप रहे हैं। इस वजह से गांव में संक्रामक बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप, 12 बजे ही बंद हो जाती पीएचसी
ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के लिए गांव में पीएचसी बनी है। मगर, इसका लाभ गांव वालों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि डॉक्टर सीतापुर से आते हैं और 12 बजे ही ताला बंद कर चले जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पीएचसी के अंदर से लेकर बाहर तक गंदगी फैली हुई है। इसे खुद सफाई रूपी इलाज की जरूरत है।
गांव में हर तरफ गंदगी ही गंदगी है। नालियों में पानी भरा है। प्रधान भी गांव में सफाई नहीं करवा पा रहे। आज तक सफाई कर्मी को गांव में सफाई करते नहीं देखा। बुखार का मुख्य कारण गंदगी है।
- माधुरी, ककरहा
सफाई न होने के कारण नालियां बजबजा रही हैं। इनसे उठती दुर्गंध के कारण घर में रहना मुश्किल है। गंदगी के कारण ही गांव में बुखार फैला है। सफाई पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
- शारदा, ककरहा
गांव में बुखार फैलने के बावजूद प्रधान साफ सफाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गंदगी के कारण सांस लेना दूभर है। जगह जगह पर गंदगी और जलभराव होने से बीमारियां तो फैलेंगी ही।
- कन्हैया लाल, ककरहा
गांव में कभी भी सफाई कर्मी नहीं आता। इस कारण गांव में जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। पीएचसी में भी डॉक्टर में दूसरे तीसरे दिन आते हैं। दवाई तक नहीं मिलती।
- मनोज शुक्ला, ककरहा
गांव में बुखार से एक किशोर की मौत हो चुकी है, जबकि एक महिला लखनऊ में भर्ती है। न तो एंटीलार्वा की दवा मिली और न ही फॉगिंग की। गांव में गंदगी का अंबार है। ग्राम पंचायत ककरहा एवं मजरा बसैकापुर की आबादी करीब 4500 है। सफाई कर्मी एक है, जो दूसरे-तीसरे दिन आता है दो लोगों को लेकर और मामूली सफाई करकर चला जाता है।
- अजय पाल, प्रधान ग्राम पंचायत ककरहा
जहां बुखार के मरीज ज्यादा मिल रहे हैं वहां एंटीलार्वा का छिड़काव कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को दवा उपलब्ध करा दी गई है। प्रधान उनसे दवा लेकर छिड़काव करवा सकते हैं। वैसे प्रधानों के पास भी बजट है उससे दवा और स्प्रे मशीन खरीद सकते हैं।
- शैलेंद्र श्रीवास्तव, जिला मलेरिया अधिकारी