इसे बिजली अधिकारियों की उदासीनता ही कहेंगे कि शहर के करीब छह हजार उपभोक्ता उनकी लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। करीब 10 माह पूर्व जिन उपभोक्ताओं ने एकमुश्त समाधान योजना के तहत अपने बिजली बिलों का भुगतान किया था, उनके बिल अब तक कम नहीं किए गए हैं। जिसकी वजह से उपभोक्ताओं का करीब 10 लाख रुपया बिजली विभाग के पास फंसा हुआ है। बावजूद इसके अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
दरअसल एकमुश्त समाधान योजना के तहत शहर के करीब 12 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने अपना बिजली बिल जमा किया था। इनमें छह हजार उपभोक्ताओं का बिल ऑनलाइन जमा हो गया था, लेकिन शेष बचे उपभोक्ताओं का बिल मैनुअली जमा किया गया था। एक अधिकारी के मुताबिक योजना के दौरान उपभोक्ताओं के बिल अवर अभियंताओं के पास भी मैनुअली जमा हुए थे। जो बिल मैनुअली जमा हुए उन बिलों की कंप्यूटर में फीडिंग नहीं की गई। नतीजतन, बिल कम न होने की दशा में वह दोबारा बिल में लग कर आ जा रहा है। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं पर बकाया बढ़ रहा है, बल्कि उसका ब्याज भी उन्हीं पर चार्ज हो रहा है। बिल कम न होने पर पीड़ित उपभोक्ताओं ने कई बार अधिकारियों के चक्कर भी काटे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। लिहाजा छह हजार में तमाम उपभोक्ताओं ने बिजली बिल जमा करना ही बंद कर दिया है। जिससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि बकाया भी बढ़ता जा रहा है। काफी तादाद में उपभोक्ताओं की इस परेशानी से बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अंजान नहीं हैं, लेकिन अब तक उनकी दिक्कतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा का कहना है कि बिजली बिल संबंधी उपभोक्ताओं की दिक्कतों को दूर किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित अवर अभियंताओं को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। रसीद होने की दशा में उपभोक्ता का पैसा उसके बिजली बिल से कम कर दिया जाएगा।