राजा विराट का था किला
कभी यहां घना जंगल था। यहीं पर राजा विराट का किला हुआ करता था। किले के खंडहर यहां आज भी ऊंचे टीलों के रूप में मौजूद हैं। इस किले में छह गुंबद हुआ करते थे जो आज भी साफ दिखाई दे रहे हैं। किला निर्माण में डेढ़ फुट चौड़ी इतनी ही लंबी ईटों का प्रयोग किया गया था। दीवारें काफी चौड़ी थीं। इसी महल के पास द्रोपदी मंदिर बनखंडी नाथ मंदिर और गदाई ताल और बंसीवट तालाब मौजूद है।
राजा विराट के किले के आसपास पांच प्राचीन कुएं आज भी मौजूद हैं, जिनमें से तीन कुओं के अवशेष तो दिखाई पड़ रहे हैं जबकि दो विलुप्त हो गए हैं। कीचक वध के समय भीम द्वारा कीचक को घसीटने के निशान कीचकाखार के रूप में आज भी यहां मौजूद हैं। कीचकाखार नाले के रूप में है। मानना है कि भीम ने कीचक को मारकर उसे घसीटते हुए गोमती की तरफ ले गए थे।
यहीं पर द्रौपदी का एक मंदिर भी मौजूद है, जिसमें द्रौपदी की मूर्ति स्थापित थी। जिसे मुगलों ने खंडित कर दिया था लेकिन खंडित मूर्ति इस मंदिर में आज भी संरक्षित की गई है जो एतिहासिक और बहुत ही पुरानी प्रतीत हो रही है। वनखंडी नाथ मंदिर तक जाने का रास्ता बहुत संकरा और कीचड़ युक्त है। देखरेख के अभाव में विरासत अपनी पहचान खो रही है।