श्रीनगर में टीकाकरण अभियान का निरीक्षण करते सीएचसी आधीक्षक।संवाद
महेवागंज/फूलबेहड़। श्रीनगर गांव में डिप्थीरिया से एक बच्ची की मौत के बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। खासकर अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों का टीकाकरण नहीं हो पा रहा है।
शुक्रवार को मदरसे में टीकाकरण कैंप लगना था। टीकाकरण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची गई, लेकिन टीम को उस समय निराशा हुई जब मदरसे वालों ने टीकाकरण को लेकर हाथ खड़े कर दिए। प्राथमिक स्कूल में करीब 40 बच्चों का टीकाकरण किया गया, लेकिन मदरसों में टीकाकरण नहीं हो पाने से स्वास्थ्य विभाग के अभियान को झटका लगा है।
बता दें श्रीनगर गांव में डिप्थीरिया के एक ही घर में तीन मरीज मिले थे। जिसमें एक इल्मा नामक बच्ची की मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग जागा और करीब छह दिन पहले गांव में सर्वे कराया। तीन बार टीकाकरण की तारीख तय की गई। किन्हीं वजहों से तय तारीख पर टीकाकरण नहीं हो सका था। शुक्रवार सुबह बारिश के बीच स्वास्थ्य टीमें फिर गांव पहुंचीं।
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया गांव के मदरसे में टीकाकरण नहीं हो सका। टीम ने प्राथमिक विद्यालय में कैंप लगाकर बच्चों का टीकाकरण किया। फूलबेहड़ सीएचसी अधीक्षक डॉ. पवन कुमार ने बताया कि गांव में डिप्थीरिया से एक बच्ची की मौत के बाद भी अभिभावक बच्चों को टीका लगवाने में हिचक रहे हैं।
घर-घर जाकर जागरूक किया जा रहा है। मदरसे में बच्चों के अभिभावकों की अनुमति नहीं मिलने से वहां टीकाकरण नहीं हो पाया। प्राथमिक स्कूल में 40 बच्चों को टीका लगाया गया। तीन दिन बाद फिर अभियान चलाया जाएगा।