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समितियों और बाजार से गायब हुआ यूरिया, किसान परेशान

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महेवागंज में खाद की दुकान पर किसानों की लगी भीड़। - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। धान और गन्ने की फसल के लिए किसान यूरिया के लिए मारा मारा फिर रहा है। न तो सहकारी समितियों पर उसे खाद मिल रही है और न दुकानों पर। आरोप है कि समितियों पर रसूखदार या सेटिंग करने वालों को गोदाम पर पहुंचने से पहले ही खाद मिल जाती है। जबकि गरीब किसान एक-एक बोरी खाद के लिए भटक रहा है। गिनेचुने फुटकर विक्रेताओं के पास यदि खाद है भी तो वे मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। साथ ही खाद के साथ जैविक खाद या कीटनाशक दवाई का थैला लेने की बाध्यता जोड़ देते हैं।
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एक फर्म पर लंबी लाइन देख जागरूक किसान ने कृषि अधिकारी से शिकायत कर दी। इसकी भनक लगते ही फर्म मालिक के इशारे पर कर्मचारियों ने खाद का वितरण रोक दिया। सरकारी समितियों पर खाद का लंबे समय से टोटा बना है। प्रतिदिन सैकड़ों किसान यूरिया के लिए एक समिति से दूसरी समिति के चक्कर काट रहे हैं। किसानों को टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया खोजे नहीं मिल रही है। कस्बा स्थित हाथीपुर गणेश गंज, कृषक भारती सेवा केंद्र, इफको समेत जिले की ज्यादातर सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से यूरिया की कोई रैक नहीं लगी है। इसके चलते ही यूरिया का संकट खड़ा हुआ है। जानकारों का कहना है कि इसी बीच अभी रैक लगने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। किसान अशोक कुमार और सुरेश का कहना है कि जब फसलों में खाद डालने का समय आता है तो खाद मार्केट से गायब हो जाती है। इसका निजी दुकानदार फायदा उठाते हैं।
प्री पोजीशनिंग स्टॉक से करीब 30 प्रतिशत यूरिया का वितरण इसी माह कराया गया है। यूरिया की और रैक आ रहीं हैं जल्द ही इसकी किल्लत समाप्त होगी। कालाबाजारी की शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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