तीन माह पहले हरिहरपुर बंजरिया मार्ग पर मानवरहित क्रॉसिंग बंद करने और बुधवार को रेलवे लाइन के दोनों और र्खाइं खोदकर पूरी तरह आवागमन बंद किए जाने से गुस्साए लोगों ने शुक्रवार को प्रदर्शन कर नेशनल हाईवे जाम कर दिया। जाम की सूचना पर एसडीएम समेत पुलिस मौके पर पहुंच गई। हालांकि इस बीच चौकी इंचार्ज के समझाने पर लोगों ने करीब एक घंटे बाद जाम खोल दिया था, जिससे आवागमन सुचारू हो सका।
हरिहरपुर बंजरिया के पूर्व प्रधान रामबोल सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग से उनके गांव तब आए संपर्क मार्ग पर करीब एक किलोमीटर पहले रोजा सीतापुर ब्रांच रेल लाइन पर बनी मानव रहित क्रॉसिंग को रेलवे ने गत दिसंबर में बंद कर दिया था, जिससे वहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत चौपहिया वाहनों का आवागमन बंद हो गया था। रास्ता खुलवाने के लिए उन लोगों ने रेलवे और जिला प्रशासन से कई बार मांग की। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर बुधवार को क्रॉसिंग पर दोनों ओर खाईं खोद दी गई, जिससे वहां से बाइक और साइकिलों का निकलना भी बंद हो गया। मार्ग पूरी तरह बंद किए जाने से गुस्साए ग्रामीण पूर्व प्रधान रामबोल सिंह के साथ शुक्रवार सुबह चौकी उचौलिया पहुंचे और प्रभारी को ज्ञापन देकर आंदोलन की सूचना दी। पुलिस को सूचना देकर लौटते समय इन लोगों का गुस्सा अचानक फूट पड़ा और चौकी के पास ही लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। कुछ देर में ही वाहनों की लंबी लाइन लग गई। इस बीच जाम लगा रहे लोगों की राहगीरों से नोकझोंक हुई। उधर हाईवे जाम होने की सूचना पर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस कंट्रोल रूम को भी सूचना दी गई, जिस पर थाना पसगवां का पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक रेलवे क्रॉसिंग नहीं खुलेगी, वह लोग जाम नहीं खोलेंगे। स्थिति को बेकाबू होते देख उचौलिया चौकी प्रभारी अवधेश यादव ने जिला और रेल प्रशासन से वार्ता कर उनकी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। काफी मशक्कत के बाद लोग मान गए, जिससे करीब एक घंटे बाद जाम खुल सका। एसडीएम मोहम्मदी शिशिर यादव भी मौके पर पहुंच गए, लेकिन इस बीच जाम खुल चुका था।
रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से पांच किलोमीटर का फेरा
उचौलिया। क्षेत्र के गांव हरिहरपुर बंजरिया तक के लिए दो मार्ग थे। पहला हाईवे से रेलवे क्रॉसिंग पार कर सीधे गांव तक गया है। दूसरा मार्ग गांव के पड़ोस के जिला शाहजहांपुर के गांव पड़रा सिकंदरपुर होते हुए गया है। रेलवे ने पहले मार्ग को बंद कर दिया, जिससे ग्रामीण पड़रा सिंकदरपुर होकर करीब पांच किलोमीटर का चक्कर लगाने के बाद गांव पहुंच पाते हैं। वहीं दूसरी ओर इस मार्ग पर सुखेता नाला पर बनी पुलिया बरसात के दिनों में डूब जाती है, जिससे गांव तक आने जाने का यह रास्ता भी बंद हो जाता है। गांव निवासी जयवेंद्र सिंह का कहना है कि बाढ़ के दिनों में अथवा गांव में आग लगने जैसी आपदा की स्थिति में गांव तक चौपहिया वाहन नहीं पहुंच सकेंगे। इसके अलावा यह मार्ग बंद होने से पड़ोस के गांव देवरास, मड़ोस वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण ग्रामीण गांव तक सीधे आए मार्ग को बंद करने का विरोध कर रहे हैं।